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632 स्टाॅपडैम में शटर नहीं, बह गया पानी हो सकती थी 31 हजार हेक्टेयर में सिंचाई

4 वर्ष पहले
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खेतों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए गांव-गांव में स्टाॅपडैम बनाए गया है, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण इन स्टापडैम में पानी रुक नहीं पा रहा है। करोड़ों रुपए की लागत से बनाए गए स्टॉपडैम में शटर नहीं होने के कारण लगातार बारिश के पानी का बहाव हो रहा है। जिले के 5 विकासखंडों में छोटे-बड़े 632 स्टॉपडैम एवं एनीकट है। एक स्टॉपडैम की औसत ऊंचाई 1.80 मीटर होती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि इन स्टॉपडैम में शटर लगा होता तो उससे करीब 31 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में आसानी से सिंचाई की जा सकती थी।

नदी-नालों में लगातार पानी का बहाव कम होता जा रहा है। ऐसे में समय रहते इस दिशा में प्रयास नहीं किए गए तो निस्तारी के लिए पर्याप्त पानी नहीं बचेगा। बहुत से स्टाॅपडैम से लोहे की कड़ी और शटर चोरी हो गए। इस वजह से यहां दोबारा कड़ी व शटर नहीं लगाया जा सका है।

सराईपाली में ज्यादा बारिश : इस वर्ष सराईपाली में सबसे ज्यादा बारिश हुई। यहां 1363.3 मिमी बारिश हुई है जबकि पिछले वर्ष 1427 मिमी पानी बरसा था। इसी तरह इस सीजन सबसे कम बारिश बागबाहरा में 689.3 मिमी दर्ज की गई।

बजट का अभाव : जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता वीएल चंद्राकर का कहना है कि स्टापडेम निर्माण के समय शटर लगाया गया था, लेकिन चोरी हो गई है। नए शटर लगाने के लिए बजट का अभाव है। बजट मिलने में शटर लगाया जाएगा।

खरीफ का रकबा 2 लाख 75 हजार हेक्टेयर
जिले में खरीफ फसल का रकबा करीब 2 लाख 75 हजार है। बारिश का पानी यदि इन स्टापडेम में रुकता तो करीब 31 हजार हेक्टेयर में सिंचाई होती। सूखे की मार झेल रहे किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होती तो खेतों में धान का उत्पादन बेहतर होता। यही नहीं इस पानी के स्टाप डेम में जमा रहने से वाटर लेवल भी रिचार्ज होता और आसपास के इलाकों में वाटर लेवल भी बना रहता।

इधर, पिछले साल से 5.1 इंच कम बारिश
सितंबर जाते ही बारिश का सीजन भी खत्म हो गया है। इस बार पिछले साल की तुलना में 5.1 इंच कम पानी बरसा। इससे भूजल स्तर कम हो गया है। पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं होने से रबी फसल के दौरान भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल सकेगा। जिले में 1 जून से 30 सितंबर तक बारिश का सीजन माना जाता है। अब तक 35.6 इंच बारिश हो चुकी है। जबकि गत वर्ष इस अवधि तक 40.7 इंच बारिश हुई थी। आशा के अनुरूप बारिश नहीं होने से रबी के रकबे में कमी आएगी। गत वर्ष की तुलना में कृषि विभाग रबी के रकबे में करीब 15 हजार हेक्टेयर की कमी कर सकता है। गत वर्ष 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी हुई थी, जबकि इस वर्ष 35 हजार हेक्टेयर रहने का अनुमान है।

केस-1. कनेकेरा एनीकट
करोड़ों की लागत से निर्मित यह एनीकट जर्जर हो चुका है। एनीकट के लिए नहर नाली का निर्माण हो जाता तो लगभग 5 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि में खरीफ की फसल के लिए पानी पहुंच जाता। एनीकट से लगभग आधा दर्जन गांवों को लाभ मिल सकता है। कनेकेरा एनीकट में भराव क्षमता 120 घनमीटर है, जिसमें 18 घनमीटर ही पानी बचा है।

केस- 2. बकमा एनीकट
बेमचा से कांपा-गोपालपुर मार्ग पर बनाई गई नहर नाली में जरा भी पानी नहीं है। यहां कई खेतों के बोरवेल भी सफल नहीं है। एनीकट के कई गेट खराब हो चुके हैं, कई जगहों पर पिचिंग में होल है, अभी भी गेट जर्जर हालत में है। बकमा एनीकट का भी भरान क्षमता 120 घनमीटर है जिसमें 40 घनमीटर पानी बचा है।

कनेकेरा स्थित एनीकट में शटर जर्जर होने कारण पानी व्यर्थ बह रहे है।

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