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5 वीं व 6 वीं अनुसूची लागू करने जुटे लोग

5 वर्ष पहले
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आदिवासी वनांचल मानपुर में भूमकाल विद्रोह दिवस के 106वीं वर्ष पर भारत के संविधान में निहित 5वीं, 6वीं अनुसूची और अन्य अधिकारों को अविलंब लागू की मांग को लेकर बुधवार को राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया। मूल निवास आदिवासी महासभा के तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन महासभा के मांगरा मुंडा, रतन मंुडा, सोमालाल कोटेड, सूरज टेकाम, कृष्णा हसदा, संतोष आत्राम, नंदकुमार बघेल, रामकृष्ण जागड़े, अर्जुन सिंह ठाकुर, नंदू आत्राम, कृष्णा नेताम, एसएलबी रामटेके, सोहन पटेल, भंवरलाल परमार एवं विष्णु मुंडा ने अपने-अपने विचार रखे।

वक्ताओं ने कहा कि पूरे भारत में लगभग 10 करोड़ आदिवासी मूल निवासी लोग जगंग, पहाड़ों में नदी किनारे और कुछ नगर ओर शहरों में बसे हैं। उन्हें आदिवासियों की हालत दिन-ब-दिन बदतर हो रही है। इतना ही नहीं आदिवासी क्षेत्र में मिलिट्री व पुलिस भेजकर डराया धमकाया जा रहा है जो इससे आदिवासी लोगों का संविधान के ऊपर से विश्वास उठता जा रहा है। इस दौरान वक्ताओं ने संविधान में निहित 5वीं अनुसूची अनुच्छेद 244(1) तथा संविधान के अनुच्छेद 13(111) में ग्रामसभा में विधि का बल रखता है। जिसमें आदिवासियों का उनकी जल, जंगल, जमीन और जान को सुरक्षित रखने का प्रावधान है।

इसी अनुच्छेद के तहत आदिवासियों को जल, जंगल और जमीन का मालिकाना हक दिया गया लेकर अभी तक देश के किसी भी क्षेत्र में 5वीं अनुसूची के अधिकारों को लागू नहीं किया गया है। इस दौरान महासभा के सदस्यों ने नगर में रैली निकालकर राष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय, राज्यपाल के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया।

मानपुर| भूमकाल विद्रोह दिवस पर बड़ी संख्या मंें एक जुट हुए आदिवासी समाज के लोग।

निकाली रैली
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