धान की बालियां देख हर्षित किसान
खरीफफसलों के हरे- हरे धान अब खेतों में लहलहा रहें हैं। अरली वेरायटी के धानों की बालियां अब निकलने लगी है जो कि किसानों के मन में उल्लास भर रही है। वहीं लेट वेरायटी के धान में कंसियों के बढ़ने से खेतों में बचे खाली जगह भी अब भरे-भरे नजर रहे हैं।
शुरूआती दिनों में आने वाली बाधाओं को पार करते हुए किसानों ने अपनी किसानी जैसे-तैसे संभाल ली है तथा बेहतर उपज की उम्मीद की आस किसानों ने लगाई है। इस वर्ष खरीफ फसल का सीजन किसानों के लिए बड़ी ही संघर्षमय रहा है। धान बोनी के समय जहां अल्पवर्षा से जूझना पड़ा तो वहीं रोपाई बियासी कार्य के लिए अतिवृष्टि का सामना करना पड़ा। जिसके कारण किसान परेशानी में रहे। शुरूआत में धान बुआई किए तो पानी का गिरना बंद हो गया था। पखवाड़े भर बाद पानी गिरा तो किसानों को दुबारा बोनी करना पड़ा तो कई किसानों को फिर से रोपणी तैयार करनी पड़ी। वहीं रोपाई के समय भारी पानी गिरने से खेतों में जरूरत से ज्यादा पानी भर गया जिसको निकालने के लिए किसानों को मशक्कत करनी पड़ी। रोपाई करने के बाद खेतों में पानी का दबाव बना रहा क्योंकि सावन महीने भर बरसात होती रही।
खरपतरवार बढ़ने की चिंता भी सता रही
भादोका महीना एक बार फिर अल्पवर्षा में बीता। जिससे खेतों में पानी कम हो गया तथा फसलों में खरपतवार बढ़ गए। उक्त सभी मुश्किलों से किसान जूझते हुए खेतों की जतन करते रहे। पानी कम होने के कारण खेतों में उग आई बेतहाशा खरपतवार को भी खेतों से निकलवाया। परिणामस्वरूप अब खेतों में धान लहलहाने लगी है। हरूना धानों में बालियां निकल आई है जो कि दूर से ही किसानों के मन में उल्लास भर रही है।