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औषधि की खेती कर मुफ्त में किया इलाज

6 वर्ष पहले
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बांधाबाजारकी एक लाख फैक्ट्री में काम करने वाले 52 वर्षीय रंजन साहू...। ये वैधराज भी हैं। 10 साल पहले इन्होंने फैक्ट्री के पीछे वाली पहाड़ी की सात एकड़ जमीन पर औषधियां उगाई। इनके पास 128 प्रजातियों की औषधियां हैं। कैंसर, बांझपन, ब्लड, पीलिया, डायरिया, दमा से लेकर शरीर की हर बीमारी का उपचार इनके पास है। आयुर्वेद की इन औषधियों के बूते रंजन ने अब तक लाखों लोगों का मुफ्त में इलाज किया है। एक मैनेजर के रूप में जो ये कमाते हैं उन्हीं से परिवार का गुजारा चलता है।

बांधाबाजार पहाड़ों के बीच बसा एक गांव हैं। यहां ज्यादातर जमीन पथरीली है। 15 साल पहले अपने मूल निवास रांची से यहां गौरीशंकर खंडेलवाल की लाख फैक्ट्री में काम करने गए। उन्होंने केमिकल इंजीनियरिंग की है। साथ ही पटना यूनिवर्सिटी से उन्होंने वैधराज का डिप्लोमा किया। यहां आकर उन्होंने फैक्ट्री के पीछे स्थित खाली जमीन पर खेती करने की बात कही। उनके मालिक खंडेलवाल ने इसे मजाक समझा। पर उन्होंने पथरीली जमीन पर खोदाई की। क्यारी बनाई और मिट्टी डालकर उस पथरीली जमीन को उपजाऊ कर दिया। इस काम में करीब डेढ़ साल लग गए। रंजन ने कहा कि जमीन पर जो फल उगेंगे वो मालिक के और औषधियां उनकी रहेगी। धीरे-धीरे करके अब तक औषधियों की 128 प्रजाति को उन्होंने लगा लिया। करीब सात एकड़ जमीन पर हरियाली है। कहीं पीले, हरे, रसदार फल लगे हैं तो ज्यादातर जगह पर औषधियों की खुशबू आम आदमी को लुभा लेती है।

केमिकलका उपयोग नहीं: बकौलरंजन उन्होंने अब तक रासायनिक खाद या दवाओं का उपयोग नहीं किया। जमीन पर गोबर, गोमूत्र और मिट्टी से बनी खाद ही डाली गई है। उनका मानना है कि रासायनिक खाद और केमिकल के उपयोग से पौधों के साथ-साथ जमीन का उपजाऊपन खत्म होता है। स्वास्थ्य के लिए यह हानिकारक है।

बांधाबाजार के खेत में औषधि के पेड़ों को दिखाते हुए वैधराज रंजन।

सेवा करने की प्रेरणा इस तरह स्कूल से मिली

लोगोंकी सेवा की प्रेरणा उन्हें स्कूल के समय मिली। रांची में स्कूल के सामने ही अस्पताल था। उनके एक मित्र संतोष की मां बीमार थी। उनके लिए दवा लाने के लिए रंजन ही गए। दवा लाकर उन्होंने संतोष को दिया तो मां का खूब आशीर्वाद मिला था। इस बात को वे भूल नहीं पाए। सेवा का यह सिलसिला शुरू कर दिया।

एक ही पेड़ में 17 प्रकार के आम मिलेंगे आपको

उनकीखेत में 17 प्रकार की प्रजाति के आम एक ही पेड़ पर उगते हैं। इसी तरह काले रंग के अमरूद भी उन्होंने लगाए हैं। उनके यहां थाइलैंड और इंडोनेशिया के संतरे हैं। बिना बीज वाले नीबू भी यहां मिलेंगे। उनके खेत में मीठा तुलसी से लेकर ऐसे कई पौधे मिलेंगे जो आम लोगों ने कभी देखा नहीं होगा।

इस तरह की औषधियां हैं रंजन के खेत में

उनकेखेत में नागकेशर शिव लिंगी पुत्र जीवक (बांझपन को दूर करने के लिए), अमृता (कैंसर के लिए), मिरगी के लिए विष्णुकांता, पीलिया के लिए देशी मेहंदी, सर्पदंश के लिए द्रोण कंद, पारिजात बुखार वात के लिए, दांत पेट के लिए मोल श्री, डायरिया और पथरी के लिए पत्थर चट्टा, दमा, सर्दी के लिए फरपीपरा, मीठी तुलसी, नार्मल डिलवरी के लिए चिड़चिड़ा, लेमन ग्रास, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला धनवंतरी, शतावर, हाथी सूंड, फिरनी, तेज पान, रीठा, अरनपत्ता, भृगराज जैसी अनेक पेड़ और पौधे हैं। वे यहां आने वाले मरीजों को पौधे देकर इसके उपचार की विधि भी बताते हैं वो भी बिल्कुल मुफ्त।