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कस्टम मिलिंग में देरी, दी गई सिर्फ हिदायत

7 वर्ष पहले
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राशनकार्ड गड़बड़ी के तार कहीं कहीं राइस मिलर्स से जुड़े हैं, यह तो साफ हो गया। क्योंकि प्रशासनिक टीम ने जब मिलों में छापा मारा तो अनुपात के मुताबिक धान चावल नहीं मिला। इसके बाद भी जिला प्रशासन ने सख्ती बरते बिना, सिर्फ हिदायतों से काम चला लिया। इसका नतीजा यह है कि अब भी जिले के राइस मिलरों से 36 हजार मीट्रिक टन धान लेना शेष है। वहीं दूसरे जिले के मिलर्स में आनाकानी करने नजर रहे हैं।

पूर्व में मार्कफेड ने जिले के 21 राइस मिलर्स को नोटिस जारी किया है। क्योंकि कस्टम मिलिंग का चावल लौटाने के लिए मिलर्स के पास नवंबर-दिसंबर तक का समय है। इसके बाद प्रशासनिक टीम ने सात रराइस मिलों में छापामार कार्रवाई कर, लाखों रुपए का धान, चावल और कनकी बरामद की। इसके बाद प्रशासन की कार्रवाई थम सी गई और उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

प्रशासनिक अधिकारी भी दबे जुबान स्वीकार रहे मिलों में खपा धान।

गोलमोल दे रहे जवाब

^इसबारे में अभी नहीं बता पाउंगा। हर रोज इसकी रिपोर्ट तैयार नहीं की जाती, इस कारण देखकर ही बता पाउंगा कि मिलर्स से कितना चावल लेना शेष है।\\\'\\\' आरएलखरे, जिलाखाद्य अधिकारी

मिलर्स शुरू से कर रहे आनाकानी

जिलेसे धान का उठाव गोंदिया के राइस मिलर्स ने भी किया। इसके बाद शुरू से ही वहां के मिलर्स ने कस्टम मिलिंग के चावल को लौटाने में आनाकानी की गई, उन्हें भी नोटिस जारी किया। फिर भी उनके रवैए में कोई बदलाव नहीं आया। फिलहाल अभी गोंदिया के मिलर्स से 4669 मीट्रिक टन चावल लेना बाकी है। गोंदिया के मिलरों ने यहां से लगभग 16 हजार मीट्रिक टन चावल का उठाव किया था। इसे लेकर भी कई तरह के सवाल उठ रहे और अफसरों ने चुप्पी साध ली।

अब खरीदी का अगला सीजन शुरू होने वाला है

एकतरफ मिलर्स ने कस्टम मिलिंग का चावल जमा नहीं किया, वहीं दूसरी ओर धान खरीदी का अगला सत्र 1 दिसंबर से शुरू होने वाला है। मार्कफेड इसकी तैयारी में भी जुट गया है। बारदानों की पहली खेप भी जिले में पहुंच चुकी है, ताकि खरीदी शुरू होने के बाद किसी तरह की दिक्कत का सामना करना पड़े।

ऐसी होती है प्रक्रिया

राज्यसरकार पहले तो किसानों ने उनका धान समर्थन मूल्य पर लेती है। इसके बाद केंद्रों ने राइस मिलर इस धान का उठाव करते हैं। इसके लिए सरकार से मिलरों का एग्रीमेंट भी होता है। दूसरी तरफ जितना भी धान मिलर केंद्रों से उठाते हैं, उसक