जूझता अमला,बढ़ रहे मरीज
मलेरियाके मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के पास तो अमला है और ही पर्याप्त बजट। विभाग में चार संविदा कर्मचारी मलेरिया टेक्नीकल सुपरवाइजर के भरोसे पूरा फील्ड का काम चल रहा है। साथ ही एक मलेरिया अधिकारी, पंप मेकेनिक, कंप्यूटर ऑपरेटर, स्टोर प्रभारी के साथ एक वाहन चालक विभाग को संभाल रहे हैं। बाकी का काम मितानिनों के भरोसे चल रहा है। उनके पास भी उपचार के पर्याप्त साधन नहीं हैं।
एक मलेरिया अधिकारी के पास एनआरएचएम, मातृत्व शिशु, रेडक्रास, आईडीएसबी के साथ मलेरिया का प्रभार है। वहीं हर गांव में ग्राम स्वास्थ्य समिति को डीडीटी छिड़काव के लिए राशि दी जाती है। इसका सालाना खर्च करीब २५ लाख रुपए है। साथ ही कार्यालयीन बजट के अलावा प्रचार-प्रसार में करीब एक लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। इसके बावजूद मैदानी स्तर पर बेहतर काम दिखाई नहीं दे रहा है। इसी वजह से लगातार बजट मिलने के बाद पीडि़तों की संख्या कम नहीं हुई।
परिसर में गंबूजिया मछली पालन का ऐसा हाल।
^जिले में डीडीटी छिड़काव का काम जारी है। अमले की कमी तो है। उतना बजट भी विभाग को नहीं मिल पा रहा है। हालांकि जिले में गंभीर स्थिति कहीं नहीं है। डॉ.मिथलेशचौधरी, जिलामलेरिया अधिकारी
संवेदनशील क्षेत्र
जिलेमें मलेरिया को लेकर चौकी, मोहला, मानपुर के साथ बकरकट्टा, साल्हेवारा, गातापार, लक्षना, टाटेकसा, जोब, कहुआपानी, गोटाटोला क्षेत्र संवेदनशील माना गया है। मलेरिया के ज्यादातर मरीज इन्हीं क्षेत्रों से आते हैं।
मलेरिया पीडि़तों का हाल
वर्ष कलेक्शन पीवीटी पीएफ मौत
२००९ २०४८०१ १५३२ ३८३ -
२०१० २१००५१ १६९६ २४९१ ०४
२०११ १९१८५३ १४६६ ६०४ -
२०१२ १८५८१८ १६१२ ३८७ -
२०१३ २११७४३ १११० ५२५ -
२०१४ १२०३०४ ६०३ ५६४ -
(15 अगस्त २०१४ तक, पीवीटी-सामान्य, पीएफ गंभीर मरीज)