पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • ३१ गांवों का रकबा गायब

३१ गांवों का रकबा गायब

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
समर्थनमूल्य पर होने वाली धान खरीदी के लिए खाद्य विभाग द्वारा की गई रकबे की एंट्री में भारी गड़बड़ी सामने रही है। पंजीयन के लिए डाले गए डाटा में 31 गांवों का रकबा ही गायब हो गया है। जिले के ऐसे 31 गांव हैं जहां एंट्री के बाद किसानों की जमीन ही नहीं बची। साफ्टवेयर के हिसाब से रकबा पूरा हो गया है जबकि इन गांवों के सैकड़ों किसानों को पंजीयन का मौका ही नहीं मिल पाएगा। इस स्थिति को देखकर प्रशासन के होश उड़ गए हैं। इसकी रिपोर्ट शासन को भी भेजी जा रही है।

पिछले साल के रिकार्ड रकबे के अनुसार ही इस बार खाद्य विभाग द्वारा ऑनलाइन इंट्री की जा रही है। विभाग द्वारा इस बार दो लाख 78 हजार 50 हेक्टेयर जमीन की इंट्री की गई। इसके बाद भी जिले के 31 गांवों की इंट्री अभी भी बची हुई है। अफसरों की मानें तो 4 हजार 692 हेक्टेयर रकबे की और आवश्यकता पड़ेगी तब जाकर यहां के सैकड़ों किसान धान खरीदी के लिए पंजीयन करा पाएंगे। रकबा पटवारियों के माध्यम से एसडीएम और उनके माध्यम से खाद्य विभाग को सौंपा गया है। अब रकबे में कमी क्यों हुई है, इस बात को लेकर प्रशासन भी चिंतित नजर रहा है।

ढाबा सोसाइटी में चल रहा है किसानों का पंजीयन, कई हलाकान होकर लौट रहे हैं।

इन गांवों का रकबा गायब

फैक्ट फाइल (रकबा हेक्टेयर में)

^रकबे की इंट्री पूरी हो चुकी है। शहर और ग्रामीण मिलाकर चार हजार हेक्टेयर रकबे की और जरूरत पड़ेगी। कई गांवों की इंट्री अभी बची हुई है। रकबा बढ़ाने शासन को पत्र लिखा गया है। आरएलखरे, जिलाखाद्य अधिकारी

छुईखदान ब्लाक के सहसपुर, कोर्रा, शाखा, ओडिय़ा, साल्हेकला, साल्हेवारा, तुम्हीडीह, बेलगांव, सिंगारपुर, हनईबन की इंट्री बची है। गंडई क्षेत्र के इंदिरा गांधी वार्ड, कबीर साहेब, कैलाश नगर, गुरुघासीदास, डॉ.आंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू, बुढ़ादेव वार्ड, महात्मा गांधी वार्ड, मां गंगई, राजीव गांधी, लालबहादुर शास्त्री, शहीद भगत सिंह, शिव मंदिर वार्ड, संजय गांधी स्वामी विवेकानंद वार्ड राजनांदगांव के कन्हारपुरी, महात्मा बुद्ध वार्ड, बजरंग वार्ड, रानी जोतकुंवर, लखोली और संत रविदास वार्ड का भी रकबा गायब है। अब शासन स्तर पर ही कुछ निर्णय हो पाएगा।

कुल रकबा 278050

अब तक इंट्री 278042.714

बचा रकबा 7.268

कुल गांवों की संख्या 1740

हुई इंट्री 1709

बचे हुए गांव 31

नुकसान किसानों का

बाध्यता समाप्