समृद्ध हो रही है हिंदी
राजभाषाप्रचार-प्रसार समिति तथा पत्र लेख मंच के संयुक्त तत्वाधान में हिन्दींं दिवस पर विचार गोष्ठि का आयोजन किया गया। गोष्ठि में विषय राष्ट्रभाषा कल,आज और कल विषय पर विचार व्यक्त किए।
मुख्य अतिथि एएसपी शशिमोहन सिंह ने कहा कि हमारी हिन्दी निरंतर समृद्ध हो रही है। हम धैर्य रखें। आने वाला कल हिंन्दी का होगा। उन्होंने मातृ शक्ति को समर्पित अपनी कविता में क्रमश: भ्रूण हत्या दहेज का प्रबल विरोध किया। नरेन्द्र ठाकुर ने कहा कि हिन्दी का विरोध कहीं नहीं हो रहा है। अब 52 में से 48 व्यंजन रह गए हैं। उन्होंने चार व्यंजनों को वापस जोड़ दिया जाए। डॉ. कृष्ण कुमार द्विवेदी कहा कि हिंन्दी अपना कलेवर बदलते हुए आगे बढ़ रही है। उन्होंने काव्य पाठ भी किया। पत्र लेखक मंच के संरक्षक डी.सी.जैन ने कहा कि हम हिंन्दी के प्रति अपने कर्तव्य से विमुख हो गए हैं। गोष्ठि में पदमलोचन शर्मा, नलिन श्रीवास्तव, शत्रुघन सिंह राजपूत, चन्द्रशेखर शर्मा, विनोद भाई रायचा, आभा श्रीवास्तव, अनुराग सक्सेना, राजेश सोनी, नरेन्द्र तायवड़े, मनोज शुक्ला, हरिश गांधी आदि साहित्यकारों ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा काव्य पाठ किया। पलेम अध्यक्ष सतीश भट्टड़ ने आभार व्यक्त किया।