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घोषणा के दो माह बाद भी किसानों को नहीं मिला सोयाबीन फसल का मुआवजा

7 वर्ष पहले
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जिलेके किसानों द्वारा 5 हजार हेक्टेयर रकबा में सोयाबीन की खेती की गई थी। छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम द्वारा वितरित की गई सोयाबीन बीज से किसानों ने बोवाई की थी।

भारतीय किसान संघ के अजय चंद्रवंशी ने बताया कि बीज निगम द्वारा किसानों को अत्यंत ही घटिया एवं अमानक स्तर के बीज प्रदान किए गए थे। जिसके कारण सोयाबीन में मात्र बीस प्रतिशत ही अंकुरण हो पाया था। जिसमें सडन डेथ सिंड्रोम नामक बीमारी के कारण मात्र 10 प्रतिशत फसल का ही उत्पादन हुआ था। श्री चंद्रवंशी ने बताया कि दो माह पूर्व राज्य शासन द्वारा सोयाबीन की जांच कराए जाने पर बीज घटिया अमानक स्तर का पाया गया। जिसके चलते छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के तीन उच्चाधिकारियों को निलंबित कर दिया गया।

साथ ही किसानों को तत्काल सहायता देने के आदेश भी दिए गए थे। सरकार द्वारा किसानों को पात्रता नुसार अधिकतम सहायता देने की घोषणा के साथ राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा मिशन के तहत रबी फसल में विशेष लाभ देने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी जिले के किसानों को अभी तक को सहायता नहीं मिल पाई है। जबकि राजनांदगांव जिले के किसानों को सहायता राशि दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि जिले के किसानों को सहायता एवं मुआवजा राशि क्यों नहीं दिया जा रहा है, यह समझ से परे है। किसान संघ ने जिले के प्रभावित सोयाबीन कृषकों को 18 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा एवं राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा मिशन के तहत रबी फसल के प्रदर्शन योजना में विशेष लाभ देने की मांग की है।