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रात में बारिश, सुबह खुल गया मौसम, जनजीवन हुआ प्रभावित

6 वर्ष पहले
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रूख क्यों बदल रहा मौसम विभाग भी नहीं बता पा रहा, 24 घंटे में बारिश की आशंका जताई

भास्करन्यूज|राजनांदगांव

ठंडकम होकर गर्मी की शुरुआत होने लगी, इसी बीच मंगलवार की रात झमाझम बारिश हो गई। मतलब ठंड और गर्मी के बीच अचानक बारिश होने लगी। मौसम विभाग के अनुसार हवाओं का रूख हर बार बदल रहा है, इस कारण हवाओं में नमी रही है और यही बारिश का कारण बना। वहीं आने वाले 24 घंटों में ऐसे हालात और बन सकते हैं लेकिन उसकी उम्मीद कम नजर रही है। लालपुर मौसम विभाग यह स्पष्ट नहीं कर पा रहा है कि हवाओं का रूख क्यों बद रहा है।

पूर्व में जरूर मौसम विभाग ने बारिश होने की आशंका जताई थी, लेकिन सप्ताहभर पहले दिन के कुछ घंटों में बादल जरूर छाए, शाम के बाद ठंडी हवाएं भी चली। इसके बावजूद बारिश होने की स्थिति नहीं बनी। अब अचानक इस तरह से बारिश होना मौसम विभाग को रास नहीं रहा है और विभागीय अधिकारी यह भी नहीं बता पा रहे हैं कि हवाओं को रूख बार-बार (विंड डिस्कनेक्टिंग) क्यों बदल रहा है। बताया गया कि पहले उत्तरी-पूर्वी हवाएं चली, उसके बाद पूर्वी-पश्चिमी हवाएं चलने लगी। ऐसा कई बार होने लगा। मौसम विभाग के अनुसार इसे विंड डिस्कनेक्टिंग का नाम दे रहा है। दूसरी तरफ वजह क्या है, यह स्पष्ट नहीं है।

रात में बारिश के सुबह शहर में काले बादल छाए रहे।

देर रात और सुबह हुई बारिश, दोपहर में तेज धूप

मंगलवारदेर रात हल्की बारिश हुई, घंटे-डेढ़ घंटे तक इसी तरह बारिश होती रही। इसके बाद सुबह तकरीबन सवा 6 बजे एक बार फिर जमकर बारिश हुई। इस तरह हुई बारिश के कारण सुबह 10 बजे तक बादल छाए रहे और ठंडी हवाएं भी चली। दोपहर को धूप तेज हो गई और हवाओं का चलना भी बंद हो गया।

ऐसे मौसम से धान पर आएगी नमी, होगा नुकसान

मार्कफेडके अधिकारी जरूर बारिश में धान भीगने को नकार रहे हैं, लेकिन बारिश होने पर सोसाइटियों में रखे धान पर नमी आती है। खासकर छल्लियों में नीचे रखी बाेरियों पर इसका असर अधिक पड़ता है। इस कारण मिलिंग के दौरान चावल टूटने की शिकायत आती है और उसमें कनकी की मात्रा बढ़ती है। इसमें राइस मिलर्स को नुकसान उठाना पड़ता है। डीएमओ एमआर धीवर ने कहा कि कही भी धान भीगने की जानकारी नहीं मिली है। पिछली बार में ऐसा मौसम बना था और अधिकारियों ने धान को नुकसान होने की बात कही और सत्र के आखिरी में धान के पीले पड़ गए थे।

डायरिया, मलेरिया की हो सकती है शिकायत

मौसमके बदलाव का असर सीधे लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। जिला अस्पताल में भी मरीजों की संख्या बढ़ रही है। खासकर सर्दी, खासी और उल्टी-दस्त की शिकायतें अधिक रही है। सीएस डॉ. चंद्रशेखर मोहबे ने बताया कि बारिश का पानी आसपास ठहरने दें, इससे मलेरिया और डेंगू जैसे रोग हो सकते हैं। इसके अलावा मक्खी और मच्छरों को पनपने से भी रोके। इससे संक्रमण फैलने की आशंका अधिक रहती है। मौसम के कारण स्वास्थ्य को लेकर एहतियात बरतना जरूरी है। जिला अस्पताल के अलावा प्राइवेट क्लिनिकों में भी मरीजों का आना-जाना बढ़ रहा है।

चने की निगरानी जरूरी, फिर कोई नुकसान नहीं

जिलेमें चने की फसल जिन किसानों की फूल अवस्था में है, उस पर कोई खतरा नहीं है। वहीं जो फसल फलीय अवस्था में है, उसमें इस बारिश के कारण इल्लियों का प्रकाेप बढ़ सकता है। इस कारण किसानों को खेत में जाकर फसल की निगरानी करनी चाहिए। इसके अलावा जिन किसानों ने अरहर की कटाई कर ली है, वे उसे पूरी तरह से सूखा ले, उसके बाद ही अरहर को बांधे। नहीं तो नुकसान हो सकता है। इसी तरह कुसुम, मक्का और धान की फसल के लिए यह बारिश फायदेमंद हैं। कृषि वैज्ञानिक वीएच तोमर ने कहा कि किसानों को विभागीय अधिकारी वैज्ञानिकों से सलाह लेने के बाद ही खेतों में दवाएं डालनी चाहिए।