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जिले के सरकारी अस्पतालों में नहीं है स्वाइन फ्लू की दवाई
प्रदेशके प्रमुख शहरों सहित अनेक स्थानों पर फैले स्वाइन फ्लू की दहशत के बीच जिले में अलर्ट जैसी कोई बात नहीं है। जिले के लगभग सभी सरकारी अस्पतालों की स्थिति ऐसी ही बताई जा रही है। यदि जिले में कोई स्वाइन फ्लू के मरीज मिल जाए, तो उसका इलाज कठिन है। पूरे जिले में स्वाइन-फ्लू की दवाइयां भी नहीं है। जिला अस्पताल सहित सभी एसीएचसी, पीएचसी के डॉक्टरों स्टाफ को केवल मास्क लगाकर कार्य करने का निर्देश दिया गया है। इसके अतिरिक्त कहीं कोई अलर्ट की स्थिति दिखाई नहीं देती।
आम दिनों की तरह ही जिला अस्पताल के वार्डों में मरीजों का इलाज चल रहा है और उनके परिजनों का आना-जाना भी जारी है। दूसरी ओर जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू से पीड़ित मरीज के पहुंचने पर इलाज के तैयारी की शुरुआत भी दिखाई नहीं दे रही है। अगर जिले में कोई स्वाइन फ्लू के मरीज मिल जाए, तो उसका इलाज जिला अस्पताल में नहीं हो पाएगा। क्योंकि जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू के वायरस को रोकने की दवाई ही नहीं है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार यहां स्वाइन फ्लू के मरीज आने पर इलाज नहीं हो पाएगा। ऐसे मरीज को हमेशा की तरह यहां से रायपुर के मेकाहारा भेजना पड़ेगा या 100 से 110 किलोमीटर की दूरी तय कर वहां से जरूरी दवाएं मंगानी पड़ेगी। जिला अस्पताल की यह स्थिति है तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है। उत्पन्न परिस्थिति में पूरे जिले भर में स्वाइन फ्लू के मरीजों का इलाज संभव दिखाई नहीं देता।
बचाव के उपाय
>सर्दी-खांसी बुखार होते ही तुरंत इलाज कराएं।
> साफ सफाई पर अधिक ध्यान दें। घर के आसपास स्वयं की सफाई में विशेष ध्यान दें।
> खान-पान में विशेष ध्यान दें। ठंडा या बासी और भारी भोजन से बचें, हल्का खाना लें।
> भीड़ वाले इलाके में जाने से पहले मास्क पहनें। बस या अन्य वाहनों से सफर करते समय मास्क का उपयोग अनिवार्य रूप से करें।
>बाहर से वापस आने पर हाथ-पैर मुंह धोकर अच्छी तरह सफाई करें।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
स्वाइनफ्लू एच वन, एन वन वायरस से फैलता है। वातावरण में नमी होने के कारण ठंड के दिनों में ही वायरस अधिक फैलता है और लोग शिकार होते हैं। स्वाइन फ्लू के शुरूआती लक्षणों में हल्का बुखार, सर्दी-जुकाम, गले में सूजन, होता है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसा होने पर घर में रहकर ही सामान्य फ्लू की दवाएं डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेना चाहिए। इसके बाद दूसरे स्टेज में गले में सूजन एवं तेज बुखार आने लगता है। ध्यान नहीं देने पर सांस लेने में परेशानी के साथ ही सांस फूलने की शिकायतें भी होने लगती हैं।
गली मोहल्लों की सफाई नहीं, संक्रमण का खतरा
कवर्धाके रमेश देवांगन रामकुमार शर्मा का कहना है कि रायपुर जैसे शहरों में स्वाइन फ्लू से एक के बाद एक कई मौतें हो गई हैं, तो यहां भी उक्त बीमारी के फैलने की आशंका से इंकार नहीं किया सकता। नगर के गली मोहल्लों में स्वामी करपात्री पार्क, देवांगन पारा, दर्री पारा, ठाकुरपारा, आदर्शनगर आदि स्थानों पर नियमित सफाई नहीं होती। जिससे यहां गंदगी फैली रहती है। गंदगी के बीच संक्रमण बढ़ने का खतरा भी बढ़ गया है। अत: स्थानीय स्तर पर भी जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। शीतला वार्ड के संजय सिंह ने बताया कि नगर में सुअरों की संख्या भी हर साल बढ़ रही है। जगह-जगह सुअरों का जमावड़ा लगा रहता है। वे नाली की गंदगी और बाहर की गंदगी को अंदर-बाहर करते रहते हैं। इससे भी संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है।
तेजी से फैलता है वायरस
विशेषज्ञोंके अनुसार स्वाइन फ्लू से लड़ने सिम्स और जिला अस्पताल में अलग से वार्ड और लैब के साथ ही पर्याप्त मात्रा में दवाइयां होनी चाहिए। स्वाइन फ्लू के वायरस बहुत तेजी से फैलता है। जानकारों का मानना है कि इलाज में जरा सी देरी जानलेवा साबित भी हो सकता है। कोई भी मरीज सात दिनों से लगातार सर्दी-बुखार से पीड़ित है, तो स्वाइन फ्लू की आशंका से बाहर निकलने के लिए उसकी जांच अवश्य कराई जानी चाहिए।
जरूरत पड़ने पर मंगाएंगे दवा
^स्वाइनफ्लू के लिए अलर्ट जारी किया गया है। सभी डॉक्टरों एवं स्टाफ को मास्क लगाने कहा गया है। रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, बिलासपुर सभी स्थानों पर दवाइयां उपलब्ध हैं। यहां से सभी की दूरी 100-110 किमीहै। जरूरत पड़ने पर मंगाई जाएगी। बीमारी की शुरुआत सामान्य तौर पर सर्दी, खांसी जुकाम से ही होती है। एक सप्ताह से अधिक समय तक शिकायत होने पर अस्पताल में जांच अवश्य कराना चाहिए।” डॉ.जीकेसक्सेना, सीएमएचओ
जिला अस्पताल में अाम दिनों की तरह ही भर्ती मरीजों का इलाज चल रहा है।