अब तीन की जगह एक मल्टी इंजेक्शन
बच्चोंको लगने वाले तीन इंजेक्शनों के बदले अब उन्हें सिर्फ एक ही मल्टी इंजेक्शन शासकीय अस्पतालों में लगाया जाएगा। जनवरी 2015 से इसकी लॉंचिंग राजनांदगांव जिले में की जा रही है। डॉक्टरों ने बताया कि इस मल्टी इंजेक्शन का नाम पेंटावेलेंट है। हालांकि पहले यह इंजेक्शन बाजार में उपलब्ध था, लेकिन इसका शासकीय उपयोग नहीं किया जाता था। अब इसकी भी पहल भी राज्य सरकार से की गई है।
शिशुओं को डीपीटी (डिप्थीरिया, पाइटोसिस टिटनेस) का एक इंजेक्शन लगता है। वहीं हेपेटाइटिस बी और हिमोफिलिश इन्फ्लुएंजा के दो इंजेक्शन लगते हैं। मतलब पांच बीमारियों से बचने के लिए अभी जो तीन इंजेक्शन लग रहे हैं, उनकी संख्या घटकर अब एक हो जाएगी। इसकी शुरुआत अगले महीने से किए जाने की तैयारी है। चिकित्सकों ने भी बताया कि अब शिशुओं को साल में नौ बार इंजेक्शन लगाना होता था, जो अब सिर्फ तीन दफे ही लगाना पड़ेगा। यह उनके स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होगा। बताया गया कि इस मल्टी इंजेक्शन को पहले पहले चरण में केरल और तमिलनाडु को लांच किया गया, इसके बाद आधा दर्जन अन्य प्रदेशों में इसकी शुरुआत की गई। अब तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ सहित दूसरे प्रदेशों में इसका इस्तेमाल करने की योजना तैयार की गई है।
इसउम्र के बच्चों को जरूरी: डेढ़महीने से लेकर एक साल तक के बच्चों को तीन इंजेक्शन लगते हैं। डॉक्टरों ने बताया कि शिशुओं को छठवें, दसवें और चौदहवें सप्ताह में इंजेक्शन की डोज दी जाती है। पहले बच्चों को तीन-तीन कर नौ इंजेक्शन साल में लगाए जाते थे। अब पेंटावेलेंट इंजेक्शन साल में केवल तीन ही लगाना पड़ेगा।
िजला अस्पताल के स्टोर में लाया गया इंजेक्शन।
सालाना १७ हजार शिशुओं को डोज
डिप्थीरिया,पाइटोसिस, टिटनेस, हेपेटाइटिस बी और हिमोफिलिश इन्फ्लोंजा का इंजेक्शन हर साल औसतन १७ हजार शिशुओं को लगाया जाता है। इस हिसाब से ४१ हजार इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है, लेकिन अब मल्टी इंजेक्शन लगाने के कारण बच्चों को १७ हजार इंजेक्शन ही लगाने पड़ेंगे। जिला अस्पताल के डॉक्टरों को उम्मीद है कि इससे मरीजों को काफी राहत मिलेगी।
^पेंटावेलेंट इंजेक्शन जनवरी से शिशुओं को लगाया जाएगा। देश के अलग-अलग राज्यों में दो चरणों में इसकी लॉंचिंग हो गई है। अब जिले मेें भी इसकी शुरुआत होगी।\\\'\\\' डॉ.बीएल कुमरे, डीईओ