निकाय चुनाव में आयोग की नीति
ईवीएम के क्रम में पिछड़ भी सकते हैं पार्टी प्रत्याशी
इसबार का नगरीय निकाय चुनाव कई मामले में अलग होगा। सबसे बड़ी खबर ये कि राष्ट्रीयकृत पार्टियों के प्रत्याशियों का नाम ईवीएम (इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन) के बैलेट मशीन पर पहले आए, यह जरूरी नहीं। विधानसभा और लोकसभा चुनाव के नियमों से परे आयोग ने सीधे प्रत्याशियों के नाम को वर्णमाला के आधार पर क्रमबद्ध करने के निर्देश दिए हैं। इससे ईवीएम के बैलेट पर प्रत्याशियों का क्रम निर्दलीय उम्मीदवार से भी शुरू हो सकता है।
निकाय चुनाव का यह नियम राष्ट्रीकृत दलों के लिए भारी पड़ सकता है। इसमें इंडियन नेशनल कांग्रेस (हाथ), भारतीय जनता पार्टी (कमल), भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (बाल और हंसिया), भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (हथौड़ा, हंसिया और सितारा), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (घड़ी) और बहुजन समाज पार्टी (हाथी) शामिल हैं। इससे पहले के चुनावों में इन्हीं पार्टियों के प्रत्याशियों के नाम वर्णमाला के आधार पर पहले रखे जाते थे। इसके बाद ही निर्दलीय अन्य पार्टियों के उम्मीदवारों के नामों की सूची बनती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। नियम जानने के बाद पार्टी आला कमान का ध्यान प्रत्याशियों के नाम पर भी अवश्य जाएगा।
बीफार्म नहीं मिला तो निर्दलीय बनकर लड़ सकेंगे: किसीभी राष्ट्रीकृत दल के प्रत्याशी को यदि पार्टी से बी-फार्म नहीं मिलता है तो वह निर्दलीय बनकर चुनाव लड़ सकता है। विधानसभा लोकसभा में बी-फार्म नहीं मिलने पर कैंडिडेट का नामांकन निरस्त करने का प्रावधान है। ऐसा इसलिए क्योंकि इन चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशी को दस समर्थक जुटाने पड़ते हैं। पार्टी से नामांकन भरने वाले को बी-फार्म नहीं मिलने पर निर्दलीय के लिए जरूरी दस समर्थकों का कोरम पूरा नहीं होता। इसलिए नामांकन निरस्त किया जाता है। वहीं निकाय चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के लिए दस समर्थक की बाध्यता नहीं है।
ईवीएम का प्रदर्शन
इधरशहर के विभिन्न वार्डों में ईवीएम का प्रदर्शन शुरू हो चुका है। इसके लिए शहर में पांच मशीनें उपलब्ध कराई गईं हैं। इसी तरह नगर पालिका पंचायत में दो-दो मशीनें दी गई है। उप जिला निर्वाचन अधिकारी एमडी तिगाला ने बताया कि इनमें से किसी भी मशीन का उपयोग मतदान के लिए नहीं किया जाएगा।
वार्डों में नई ईवीएम मशी का प्रदर्शन शुरू हो चुका है।
ईवीएम के एक बैलेट मशीन मे