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फूड सेफ्टी एक्ट में टैक्स की सख्ती से व्यवसायी परेशान
जानिए क्या है एक्ट में...
जिम्मेदारों ने यह कहा...
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के रजिस्ट्रेशन को लेकर शहर के व्यापारी नगर निगम की कार्यप्रणालीे से परेशान हैं। रजिस्ट्रेशन के लिए उनसे दुकान के टैक्स की रसीद मांगी जा रही है, जबकि केंद्र सरकार के इस एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। खासकर किराए की दुकानों में अपना कारोबार चलाने वालों को दिक्कत हो रही है। अगर रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ तो उन्हें प्रशासनिक दिक्कतें सहनी पड़ेगी। सिर्फ निगम की मनमानी के कारण।
सालाना 12 लाख रुपए तक के टर्नओवर वाले व्यापारियाें को फूड सेफ्टी एक्ट के तहत पंजीयन कराना आवश्यक है। शहरी व्यापारियों के पंजीयन के लिए नगर निगम इकाई को अधिकृत किया गया है। इसलिए शहर के तमाम दुकानदार निगम पंजीयन कराने पहुंच रहे हैं तो निगम प्रशासन उनसे टैक्स की रसीद मांग रहा है। यह स्थिति ज्यादातर दुकानदारों के लिए परेशानी वाली है। क्योंकि जरूरी नहीं कि दुकान संचालक खुद की सपंत्ति पर ही कारोबार कर रहा हो। आमतौर किराए की दुकान पर भी व्यापार किया जा है। इसलिए उनके लिए निगम का यह रवैया उनके लिए समस्या पैदा कर रहा है।
50रुपए का स्टांप कर रहे जरूरी
दुकानदारोंको पंजीयन कराने के साथ-साथ इस एक्ट के तहत निगम में एक शपथपत्र भी देना है। यह 10 रुपए वाले स्टांप में भी दिया जा सकता है, जबकि निगम के अधिकारी 50 रुपए का स्टांप में शपथपत्र देने को कह रहे हैं। सीधे तौर एक दुकानदारों को निगम अधिकारियों के कारण 40 रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पंजीयन होने से उपभोक्ता को लाभ
>सही दाम बेहतरी सामग्री।
> संदेह होने पर गुणवत्ता की सीधी शिकायत।
> हर खाद्य सामग्री पैकेट में मिलेगी।
>खुली चीजें खरीदने से बचेंगे।
>सेहत पर कोई बुरा प्रभाव नहीं
लाइसेंस शुल्क भी सामान्य
लाइसेंसके रजिस्ट्रेशन शुल्क को भी ज्यादा नहीं रखा गया है। पहले कैटेगरी वाले को को 100 रुपए, दूसरे को 2000 और तीसरे को 7500 रुपए सालाना देना होगा। एक बार में दुकानदार अधिक से अधिक पांच साल के लिए लाइसेंस ले सकता है
यहां से होगा रजिस्ट्रेशन
12लाख से कम टर्नओवर वालों का रिजस्ट्रेशन नगर निगम, नगर पंचायत, जनपद पंचायत, ग्राम पंचायत से होगा। वहीं 12 लाख से 20 करोड़ तक के लिए ड्रग एंड फूड विभाग और 20 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले दुकानदारों को सीधे केंद्र स