पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • बड़ों का हुक्का पानी, बच्चों की चॉकलेट खजानी सब बंद

बड़ों का हुक्का-पानी, बच्चों की चॉकलेट-खजानी सब बंद

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
शहर से महज सात किमी दूर बनभेड़ी के दो परिवारों को गांव वालों ने कुसूरवार ठहराया। सजा सुनाई। हुक्का-पानी बंद किया। उन परिवारों के बड़ों के साथ बच्चे भी इसकी चपेट में गए। पहली का नीलेश दरवाजे की कुंडी ऐंठते हुए कहता है, स्कूल में साथ रहते हैं पर गांव आते ही सब दूर होने लगते हैं। चौथी में पढ़ने वाली खुशी के साथ कोई खेलता नहीं। पैर की उंगली से फर्श कुरेदती हुई बोली, इसलिए घर से बाहर ही नहीं जाती। आंगनबाड़ी में खेलकूद कर घर लौटे शुभम की िशकायत सुनो, दुकानदार उसे खजानी (खाने की चीज) नहीं देता। ये तीनों बच्चे हैं समारू राम साहू के परिवार के। गांव वालों ने सबसे पहले इस परिवार का हुक्का-पानी बंद किया।

समारू ने बताया कि 16 जनवरी 2013 से गांव वालों ने उन्हें छोड़ दिया। इसके बाद अपने भाई मोतीराम साहू की मौत पर दुख व्यक्त करने भी वह नहीं जा सका। परिवार में दो-दो शादियां हुईं, लेकिन उन्हें आमंत्रण नहीं मिला। उनके साथ बातचीत करने वाले चार व्यक्तियों को अब तक दंडित किया जा चुका है। समारू की प|ी लक्ष्मीबाई बोली, घर मंे 14 सदस्य हैं। किसी के साथ भी गांव वालों का व्यवहार ठीक नहीं। चरवाहा जानवर नहीं चरा रहा। धोबी कपड़े नहीं ले जाता। नाई आता नहीं। किराने का सामान शहर या रामपुर से मंगाना पड़ता है। आखिर कब तक कोई ऐसे जिएगा। समारू ने बताया कि कलेक्टर, एसपी, सांसद सभी से गुहार लगा चुका हूं पर हुआ कुछ नहीं। नौ माह से एेसा ही चल रहा।

जमीनविवाद का मामला

समारूराम ने बताया कि वह गांव में घर बना रहा था। गांव वालों ने कहा कि निर्धारित नाप से अधिक हिस्से में निर्माण हो रहा है। छोड़ना पड़ेगा। मैंने नहीं छोड़ा। इसके बाद गांव में बैठक हुई और उन्हांेने हमें छोड़ दिया।

हुक्का-पानी की सजा भुगत रहा समारू राम और उसका परिवार।

बातचीत करते पकड़ाए तो सजा

सहदेवनगर में मजदूरी कर रहा गांव का ही श्रीराम कंवर बोला, मेरा कुसूर केवल ये था कि मैंने अपने दोस्त संदीप और विजय (समारू के बेटे) से बात की। एक बार पकड़ाया तो पांच हजार दंड ले लिए। दूसरी बार पकड़ाया तो बैठक बुलाए। मैं गया ही नहीं। उन्होंने एकतरफा सजा सुना दी। उसकी प|ी सगनी बाई ने बताया कि अब कोई बात ही नहीं करता।

उसे किसी ने नहीं, उसने खुद गांव वालों को छोड़ा

गांवके बुजुर्ग वासुदेव साहू ने बताया कि समारू को गांव से 10 डिसमिल जमीन दी गई। उसने 6 डिसमिल