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जाति, काल और समय से उठकर साहित्य का सृजन
मुख्यमंत्रीडॉ.रमन सिंह ने कहा कि राजनांदगांव की माटी का सौभाग्य जहां पर गजानन माधव मुक्तिबोध जैसे कालजयी रचनाकार साहित्य सृजन किया करते थे। मुख्यमंत्री डॉ. सिंह शनिवार को दिग्विजय महाविद्यालय के सभागार में आयोजित हिंदी के सबसे संघर्ष शील हिन्दी गद्य के उन्नायक गजानन माधव मुक्तिबोध की 50वीं पुण्य तिथि पर आयोजित कार्यक्रम के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. सिंह एवं अतिथियों ने डॉ. राजेंद्र द्वारा रचित पुस्तक छत्तीसगढ़ में मुक्तिबोध विमोचन किया। उन्होंने कहा कि मुक्तिबोध ने जाति, काल एवं समय से उठकर साहित्य सृजन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम मुक्तिबोध के साहित्यिक विरासत रचनाधर्मिता पर चर्चा करते हैं तो हम गौरवान्वित हो उठते हैं कि उन्होंने राजनांदगांव की धरती पर साहित्य सृजन किया है। मुक्तिबोध ने अपने 11 साल की महत्वपूर्ण साहित्य साधना राजनांदगांव में की है। मेरा सौभाग्य है कि मैं उस माटी का विधायक हूं जो मुक्ति बोध की कर्मभूमि रही है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सिंह ने कहा कि मुक्ति बोध दुनिया में अकेले ऐसे साहित्यकार होंगे जो असीमित प्रतिभा के खान होने के बावजूद इतने संकोची थे। कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री राजेश मूणत, स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल, सांसद अभिषेक सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल, सुधीर रंजन, श्रीकांत श्रीवास्तव, आशीष त्रिपाठी, प्रमोद वर्मा, अशोक शर्मा, लीलाराम भोजवानी, खूबचंद पारख, महापौर नरेश डाकलिया मौजूद रहे।
पूरा छत्तीसगढ़ गौरवान्वित है
संस्कृतिमंत्री अजय चंद्राकर ने कहा कि इस सदी के सबसे बड़े हस्ताक्षर मुक्तिबोध के कारण राजनांदगांव के साथ समूचा छत्तीसगढ़ गौरवान्वित है। उन्होंने साहित्यकारों को किसी भी साहित्यिक कृतियों पर समवेत मूल्यांकन की अपील करते हुए कहा कि राज्य की धरती वह धरती है, जहां पर विचारों की असहमति को भी सम्मान दिया जाता है। उन्होंने यहां की माटी को साहित्यिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध बताया। चंद्राकर ने कहा कि साहित्यकारों की योगदान को दो वर्षों के भीतर दुनिया के सामने लाएंगे।
जनवरी में होगा आयोजन
इसअवसर पर उन्होंने नगर के साहित्यकार गजानन माधव मुक्तिबोध, डॉ.पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी तथा डॉ.बल्देव प्रसाद मिश्र का भी स्मरण किया। मुख्यमंत्री