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बैरियर पर स्टिकर से उगाही

7 वर्ष पहले
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पाटेकोहरा बैरियर पर चालान के अलावा ट्रक वालों को एंट्री स्टिकर बेचा जा रहा।

प्राकृतशरण सिंह| राजनांदगांव

गुरुवारदोपहर पाटेकोहरा पहुंची भास्कर की टीम को मौके पर इस तरह की अवैध उगाही के प्रमाण मिले। दोपहर 12.55 से 1.20 बजे तक ऐसी आठ से दस गाड़ियां पार हुईं। ट्रक ड्राइवर गाड़ी के कागजात दिखाते, इंट्री कराते और स्टिकर के पैसे देकर वापस जाते। काउंटर के ठीक सामने सड़क की दूसरी ओर बैठे पांच कर्मचारी हर वाहन पर नजर रखे हुए थे।

इसके अलावा उनकी नजर अनजान चेहरों को भी तलाश रही थी। इतने में काउंटर के पास आया रायपुर निवासी चालक संजय यादव। उसने काउंटर पर चालान के लिए पूछताछ की अपना नंबर बताया और जाने लगा। पूछने पर बताया कि वह पहली बार नहीं आया है। उसके ट्रक की इंट्री पहले से ही है। वहां खड़े एक शख्स ने बताया कि यहां तो रोज का काम है। महीने की 30 तारीख को ज्यादा गहमा-गहमी रहती है। यह दूसरे महीने की पांच तारीख तक चलती है। इन्हीं पांच से छह दिनों में वारा न्यारा होता है। जमकर वसूली होती है और कोई देखने वाला भी नहीं रहता। भारी वाहनों के हिसाब से उनके चालान काटे जाते हैं और स्टिकर के रेट भी फिक्स हैं।

लोकलकर्मचािरयों के जिम्मे छोड़ दिया बैरियर का काम

अवैधउगाही के चलते बैरियर में लोकल कर्मचारी पाले जा रहे हैं, जो स्लिप इकट्ठा करने से लेकर ट्रक चालकों को रोकने तक काम करते हैं। इसी तरह खाना बनाने, नाई, मोची, धोबी, मालिश करने वाले और छोटे-मोटे काम करने वालों की भी कमी नहीं। वहां स्लिप जमा करने का काम कर रहे ठाकुर राम ने बताया कि उसकी ड्यूटी चार घंटे की है। इसके बाद दूसरा लड़का आएगा। इसी तरह शिफ्टिंग में काम होता है। थकान नहीं होती।

{प्रदेश में आरटीओ के अधिकारी कर्मचारियों द्वारा चेकपोस्ट पर ही टोकन बेचा जा रहा है, क्या आपको पता है?

{{मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। आपके माध्यम से पता चल रहा है।

{जिनके पास टोकन नहीं है, उन्हें चेकपोस्ट से गुजरने नहीं दिया जा रहा है, ऐसा क्यों?

{{टोकन वाला कोई सिस्टम नहीं है। आपने देखा होगा तो मैं जरूर पता करवाता हूं। आप टीआई से बात करो।

{चेक पोस्ट पर ग्रामीण थे, क्या आप उन्हें सैलरी देते हैं क्या?

{{चेक पोस्ट पर आरटीओ के जवान होने चाहिए। प्राइवेट लोगों से हम कोई सेवा नहीं लेते तो उन्हें सैलरी क्यों देंगे। आरटीओ टीआई से ही