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महिलाओं की लगन से उपरवाह को साक्षरता पुरस्कार
घुमकामार्ग पर स्थित उपरवाह की महिलाएं पढ़ लिखकर आधुनिक हो गई हैं। वहां ज्यादातर बुजुर्ग महिलाएं साक्षर मिलीं। कंप्यूटर साक्षरता में भी उनकी खासी रुचि दिखाई दी। 40-45 साल से अधिक उम्र की तकरीबन 25 महिलाएं वहां के शिक्षा केंद्र मंे कंप्यूटर सीख रही हैं। खेत में काम कर रही महिलाओं ने शत प्रतिशत साक्षरता के सबूत दिए। जब वे कंप्यूटर पर बैठीं तो माउस और की बोर्ड का इस्तेमाल कर पेंटिंग भी बनाया। शायद इसी की वजह से पंचायत को राज्य स्तर पर साक्षरता पुरस्कार मिला है। राज्यपाल बलराम दास टंडन 22 सितंबर को यह पुरस्कार देंगे। ब्लाक केटेगरी में चौकी का चयन किया गया है। इसी तरह जिले को राष्ट्रीय विशेष पुरस्कार दिया जाएगा।
भास्कर की टीम से चर्चा के दौरान उपरवाह की महिलाओं ने इसे साबित किया। खेत में काम कर रही 52 साल की गीताबाई पति टुमन लाल ने रिपोर्टर के पैड पर अपना नाम लिखा। कंप्यूटर, की-बोर्ड, माउस का इस्तेमाल करना बताया। यह भी कहा कि शाम को घर लौटने के बाद घर का काम कर ठीक 7.30 बजे वे शिक्षा केंद्र पहुंच जाती हैं। इसी तरह लोक शिक्षा केंद्र मंे मिली 36 साल की भानबाई पति सुखनंदन यादव ने कंप्यूटर ऑन किया। की बोर्ड पर उंगलियां दौड़ाई और अपना नाम लिखा। फिर पेंट-ब्रश खोला और आकृतियां बनाकर उसमें रंग भरा। आज वे कंप्यूटर से भी जुड़ चुकीं हैं। लाइब्रेरी से कहानी की किताबें लेकर जाती हैं। उसे पढ़कर बच्चों को सुनाती हैं। वहां 225 महिलाओं और 56 पुरुषों को साक्षर कर शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया है।
^उपरवाह में साक्षरता के िलए हुए नवाचार को देखते हुए राज्य स्तरीय साक्षरता पुरस्कार के िलए चुना गया है। इसी तरह ब्लाक केटेगरी में चौकी का चयन हुआ है। राज्यपाल इन्हें पुरस्कृत करेंगे।\\\'\\\' -रश्मिसिंह, सहायकसंचालक, साक्षर भारत कार्यक्रम
इस उम्र में कंप्यूटर सीख रही ग्रामीण महिलाएं: कंप्यूटरसाक्षरता पाने वालों में धनबाई (55), कुंती (50), पुष्पाबाई (46), मिथलेश्वरी (45), सुशीला (40), सेवंतीन (49), मान बाई (39), कीर्तन बाई (46), सुरेखा (38), इजान बाई (46), झूला बाई (45) और तिजबाई का कहना है कि पहले कंप्यूटर के बारे मंे नहीं जानते थे। अब तो आसान लगने लगा है। प्रेरक सुरेश कुमार आडिल ने बताया कि फिलहाल 40 महिलाएं कंप्यूटर सीख रही हैं। रोजाना औसतन 20 लोगों की उपस्थिति रहती है। कुछ लोग एक-दो दिन का गैप क