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अभिनंदन के बाद मांगी क्षमा और परिजनों से बोली अलविदा

6 वर्ष पहले
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सांसारिकसुखों एवं भोग-विलासिता से विमुख होकर संयम जीवन धारण करने जा रही क्षमा टाटिया ने अभिनंदन बाद सभी से अपनी गलतियों के लिए माफी मांगी और कहा, जाने अनजाने किसी का दिल दुखाया हो तो क्षमा करें। फिर बोली अलविदा... अलविदा... अलविदा। उसके इतना कहते ही परिजनों के आंसू रोके रुके। सभी परिजनों की आंखें नम थीं।

इससे पहले सदर बाजार स्थित नए जैन स्थानक भवन से दीक्षार्थी बहन की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरता हुआ वापस जैन स्थानक भवन पहुंचा। दीक्षा समारोह में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान जैसे प्रदेशों से सैकड़ों की संख्या में धर्मप्रेमी जनता राजनांदगांव आए हुए हैं। दोपहर एक बजे उदयाचल प्रांगण में दीक्षार्थी क्षमा टाटिया का अभिनंदन समारोह प्रारंभ हुआ।

समारोह के मुख्य अतिथि नागपुर निवासी नवल चंद पुगलिया थे। अध्यक्षता चेन्नई निवासी भीखमचंद बाफना ने की। शहर एवं बाहर के अनेक संस्थाओं ने अभिनंदन पत्र भेंटकर दीक्षार्थी का अभिनंदन किया। दीक्षार्थी ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में संसार की असारता पर जोर देते संयम की महत्ता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में शामिल होने जैन समाज ने दुकानें बंद रखी।

आज करेंगे वंदन

दीक्षाआयोजन समिति के प्रमुख गौतम चंद बोहरा ने बताया कि कल 11 फरवरी को सुबह 7 बजे सिनेमा लाइन से महाभिनिष्क्रमण यात्रा प्रारंभ होकर उदयाचल जाएगी। जहां पर साढ़े 8 बजे पूज्य महासती चंदनबाला मसा द्वारा दीक्षार्थी क्षमा टाटिया को दीक्षा ग्रहण कराई जाएगी।।

अब तक संस्कारधानी के 34 लोगों ने अपनाया है वैराग्य

संस्कारधानीमें अब तक जैन समुदाय के 34 लोगों ने वैराग्य धारण किया है। क्षमा के परिवार से उनकी दो बुआ, दादा, बुआ दादी ने भी वैराग्य लिया है। वे दो भाइयों में इकलौती हैं। इंटीरियर डेकोरेशन का कोर्स करने के बाद क्षमा ने वैराग्य की राह पकड़ी है। परिजनों ने भी उनके इस निर्णय को स्वीकार किया।

शोभायात्रा में टाटिया परिवार की लाड़ली क्षमा।