पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • जमीन की कम हो रही रजिस्ट्री, अब बढ़ने लगा रेवेन्यू का टेंशन

जमीन की कम हो रही रजिस्ट्री, अब बढ़ने लगा रेवेन्यू का टेंशन

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
पिछले साल 12344 और इस बार सिर्फ 11294 रजिस्ट्रियां हुई, 2014-15 में 52 करोड़ का टारगेट मिला है

भास्करन्यूज |राजनांदगांव

इससाल जमीन की रजिस्ट्रियों में कमी आई है, इसी का नतीजा है कि जनवरी तक राजस्व वसूली में 20 फीसदी की कमी आई है। हालांकि अफसर वित्तीय वर्ष के अंत तक टारगेट पूरा होने की बात कह रहे हैं, क्योंकि पिछले साल भी 90 फीसदी के करीब टारगेट पूरा किया गया था। इस बार लक्ष्य में भी बढ़ोतरी कर दी गई है। इसके चलते भी राजस्व की आवक कम दिख रही है। अभी अधिकारियों के पास तकरीबन डेढ़ महीने का समय शेष है, जिसमें उन्हें टारगेट पूरा करना है।

2014-15 में राजस्व के लिए जिले में 52 करोड़ रुपए का टारगेट मिला था। इसमें जनवरी तक 73 फीसदी प्राप्ति करना था। पंजीयक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार अब तक सिर्फ 27 करोड़ रुपए की प्राप्ति हुई है। मतलब केवल 52 प्रतिशत। दो महीने ही शेष बचे हैं, उसमें राजस्व का बोझ बढ़ गया है। टारगेट के विपरीत प्राप्ति आधी ही हो पाई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि फरवरी के आखिरी सप्ताह से लेकर मार्च अंत तक काफी रजिस्ट्रियां होती है। इसलिए राजस्व टारगेट के करीब पहुंच ही जाएगा। अब देखना होगा कि इस साल राजस्व प्राप्ति 90 फीसदी तक भी पहुंच पाती है या नहीं। जमीनी खरीदी-बिक्री का कारोबार भी कम हो गया है, इसलिए भी कमी आना जायज है।

अबतक होने वाली रजिस्ट्री में से हजार कम हुई इस साल

बतायागया कि इस सत्र में 11 हजार 294 रजिस्ट्रियां हुई हैं, जबकि पिछले साल 2013-14 में 12 हजार 344 पंजीयन हुए थे। इस हिसाब से 1050 रजिस्ट्रियां कम हुई है। इस कारण भी राजस्व में कमी आना लाजमी है। जानकारों की मानें तो इस साल राजस्व की प्राप्ति 80 से 85 फीसदी पर ही अटक जाएगी। क्योंकि राज्य सरकार ने कई शुल्कों में कमी की है, इसके विपरीत टारगेट 44 करोड़ से बढ़कर 52 करोड़ कर दिया है। इसलिए यह स्थिति बनाना ही है।

जमीन खरीदने तहसील कार्यालय में स्टांप खरीदते ग्राहक।

मंदी से जमीन का कारोबार भी ठंडा

जमीनकारोबारियों की मानें तो रियल इस्टेट के लिए यह मंदी का दौर है। इस कारण जमीन की खरीदी-बिक्री कम हो रही है। पिछले दो-तीन सालों से यह काम ठंडा भी है। छिटपुट सौदे को छोड़ दिया जाए तो जमीन के सौदे के बराबर है। तीन पहले जमीन का कारोबार पूरी तरह से उछाल पर था।

महिलाओं को सवा करोड़ की छूट

जमीनकी रजिस्ट्री में महिलाओं को स्टांप ड्यूटी में 1 प्रतिशत की छूट मिलती है। जैसे पुरुषों को ड्यूटी 6.5 फीसदी लगती है। वहीं महिलाओं को 5.5 लगती है। इस हिसाब से साल 2014-15 में अब तक जिले में महिलाओं को 1 करोड़ 30 लाख रुपए की छूट मिल चुकी है। नियम 3-4 साल से लागू है।

इनवेस्टरों की रकम बायपास में भी फंसी, इसलिए भी आई कमी

जिलेमें जमीन के कारोबार में अब रुपए लगाने वालों में कमी आई है। क्यों कि ज्यादातर निवेशकों का रुपया बायपास में फंसा है, इसकी रकम 1 हजार करोड़ रुपए से अधिक है। दूसरी तरफ उस एरिया की अब खरीदी-बिक्री कम हो गई और दाम भी काफी बढ़ गए हैं। इसलिए जिले के अन्य हिस्सों में निवेशक हाथ खींचते नजर रहे हैं। वहीं बायपास में बड़े-बड़े सौदे अटके हुए हैं, करोड़ों रुपए फंसने के कारण निवेश में भी कमी गई है। क्योंकि यहां पूंजी में बढ़ोतरी के लिए निवेशकों केना लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

^अब तक 27 करोड़ रुपए राजस्व की प्राप्ति हो चुकी है। वित्तीय वर्ष के आखिर तक इसे प्राप्त कर लिया जाएगा, पिछले साल की तुलना में इस बार जमीनों की रजिस्ट्रियां कम तो हुई हैं। बीएसनायकजिला पंजीयक