लड़कों और लड़कियों को जागरूक करना जरूरी
पुलिस अधिकारियों से लैंगिक अपराधों पर की चर्चा, कहा जागरुकता लाने की जरूरत।
भास्करन्यूज |राजनांदगांव
बालसंरक्षण आयोग की अध्यक्ष शताब्दी पांडेय ने मंगलवार को पुलिस अधिकारियों के लिए सेमीनार आयोजित किया। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से चर्चा भी की। उन्होंने लैंगिक अपराधों के मामले में कहा कि इस तरह की वारदातों को रोकने के लिए लड़कों और लड़कियों को दोनों को जागरुक करने की जरूरत हैं। इससे ही इन पर कमी लाई जा सकती है।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि बालिकाओं के घर से चले जाना या अन्य मामलों में लड़कों पर जोर देना जरूरी है। लैंगिक अपराध उनके द्वारा ही किए जाते हैं। अध्यक्ष पांडेय ने कहा कि इसके लिए पुरुष बालकों वाले संस्थानों में सेमीनार अन्य माध्यमों से इसकी संवेदनशीलता को बताया जाना चाहिए। इस तरह की पहल ही इनकी कमी के लिए सार्थक होगी। उन्होंने कहा कि जिले में बालिकाओं के गायब होने के मामले में भी रहे हैं, उसकी बकायदा जानकारी भी पुलिस विभाग से ली जा रही है। ऐसे मामलों पर तो अब सुप्रीम कोर्ट के भी निर्देश गए हैं। उन्होंने कहा कि लैंगिक अपराधों को रोकने के लिए हर वर्ग को ध्यान देना होगा, इसके अलावा जागरुकता को लेकर भी काम करना होगा। खासकर ग्रामीण इलाकों में इसकी ज्यादा जरूरत है। आंकड़ों की मानें तो ग्रामीण इलाकों में लैंगिक अपराधों की संख्या अधिक है। इसलिए वहां जागरुकता के लिए ठोस पहल की जानी चाहिए।
हॉस्टलपर ध्यान जरूरी
अध्यक्षपांडेय ने कहा कि छात्रावासों में भी लैंगिक अपराधों के मामले सामने आते हैं। इसलिए यहां भी ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने जिले के छात्रावासों में पुरुष स्टाफ काे रखने की बात कही। ताकि अपराधों को होने से रोका जा सके। गौरतलब है कि पूर्व में बालिकाओं से संबंधित कुछ मामले में जिले में सामने चुके हैं।
बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष शताब्दी ने ली पुलिस अफसरों की बैठक।
उद्देश्यों के हिसाब से किए जाने चाहिए काम
सेमीनारका आयोजन पुलिस कंट्रोल रूम में किया गया। वहां अध्यक्ष पांडेय ने कहा कि बाल संरक्षण को लेकर कई संस्थाएं काम कर रही है, सभी उद्देश्यों के हिसाब से काम करें। उन्होंने थानों में बाल कल्याण अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों के बारे में बताया। लैंगिक अपराधों के मामलों को संवेदनशीलता के साथ निराकरण करें। रोकथाम के लिए बेहतर काम करने की जरूरत है।