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एक पद पर दाे स्टेनो, भर्ती के बाद भी ठेके पर काम

7 वर्ष पहले
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नगरनिगम में कहीं कर्मचारियों की कमी है तो कई विभागों में अतिशेष की स्थिति है। भवन नजूल शाखा में महीनेभर में १५ से २० प्रकरण आते होंगे। जबकि इस विभाग में रेग्युलर और ठेका मिलाकर तकरीबन १३ अधिकारी-कर्मचारी काम कर रहे हैं। मतलब औसतन दो प्रकरण के लिए एक कर्मचारी। इसी तरह स्टेनो का एक ही पद है। लेकिन यहां दो लोगों से काम लिया गया है, वह भी एक ठेके पर रखा गया है और दूसरे को अभी नियुक्त किया गया है। इस तरह निगम को हो रही आर्थिक क्षति को नकारा नहीं जा सकता। इधर विभागीय अधिकारी अब इस पर गोलमोल जवाब दे रहे हैं।

निगम में स्टेनो का एक ही पद है। पहले भर्ती नहीं होने के कारण ठेका कर्मचारी मुकेश ठाकुर से स्टेनो का काम लिया जा रहा था। अब भर्ती के बाद सेटअप पोस्ट के अनुसार चंद्रशेखर कुमार की स्टेनो की नियुक्ति हो चुकी है। इसलिए अब रेग्युलर कर्मचारी की स्टेनो का काम करेगा। क्योंकि उसकी भर्ती इसी काम के लिए है। बल्कि निगम प्रशासन ऐसा नहीं कर रहा है। इसलिए निगम के स्टेनो को सेकेंडरी कर दिया गया है और पूरा काम ठेका वाले स्टेनो से कराया जा रहा है। इस पर अिधकारी अब ध्यान देने की बात कर रहे हैं।

भवननजूल शाखा का हाल ऐसा

भवननजूल शाखा में सहायक ग्रेड-1, स्टेनोटाइपिस्ट, पटवारी, ड्राफ्समैन, कंप्यूटर ऑपरेटर, लिपिक सहित 13 अधिकारी-कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं। कंप्यूटर ऑपरेटर और लिपिक ठेके पर है। जबकि भर्ती में इन पदों पर िनयुिक्त हो चुकी है।

^सीधी भर्ती से नियुक्त होने वाले कर्मचारी ज्वाइनिंग ले रहे हैं। इसके बाद जांच की जाएगी कि कितने कर्मचारियों की जरूरत है। इसके बाद ठेका कर्मचारियों के बारे में विचार किया जाएगा। डोमनसिंह, कमिश्नर,नगर निगम

लिपिकों को अब तक नहीं दी गई है ट्रेनिंग

सीधीभर्ती के तहत आए लिपिकों और ऑपरेटरों को काम करने में दिक्कत रही है, इसे लेकर खबरें आई। इस पर तत्कालीन आयुक्त टीके वर्मा ने उन्हें प्रशिक्षण देने की बात कही। दूसरी तरफ अब तक ऐसा कुछ किया नहीं गया। इस कारण ठेका कर्मचारियों से ही काम लेना मजबूरी बन गया है।

िलपिक और ऑपरेटर की भर्ती पर उनसे काम लेने में परहेज। ट्रेनिंग भी अब तक नहीं हो पाई।