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नौधा भक्ति के माध्यम से ही भगवान से संपर्क
स्टेटहाई स्कूल प्रांगण में आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ की कपिल जन्म के साथ शुरुआत हुई। कथा वाचक भागवताचार्य नरेशभाई राजगुरु ने वृदांवन धाम में श्राेताओं से कहा कि आजकल सभी के पास दस नवंबर वाले मोबाइल फोन हैं, जिससे बड़ी आसानी से अपने ईष्ठ मित्रों, परिजनों से हाल-चाल पूछा जा सकता है।
भगवान से भी बात करने के लिए नौ नंबरों वाले मोबाइल से संपर्क किया जा सकता है। वो नंबर है नौधा भक्ति। इस भक्ति में पहला श्रवण, दूसरा कीर्तन, तीसरा स्मरण, चौथा पाद सेवनम, पांचवा अर्चन, छठवा वंदन, सातवां दस्यी भक्ति, आठवां सखीय और नवा आत्म निवेदन इन नौ साधनों से आसानी से भगवान की प्राप्ति की जा सकती है।
कान्हा महिला मंडल के इस आयोजन में कथावाचक राजगुरु ने कहा कि इसके साथ ही मनुष्यों को सरल, सहज, सजगता से भी भगवान मिल सकते हैं कि 16 श्रृंगार कर भगवान के दरबार पहंुचने से। उन्हें प्राप्ति के लिए मानव की सरलता का मतलब है आप जैसे अपने लिए वैसे ही दूसरों के लिए रहें, सहज हमेशा रहें और तीसरा सजगता अर्थात् भगवान की बनाई संसार में उनकी भक्ति के लिए भक्तिों के लिए तत्पर रहें।
धर्म किसी को जोड़ता कि तोड़ता, धर्म सत्य पर चलना सिखता है। उन्होंने कहा कि सदगुरु वह जो सच्चे मार्ग पर चलना सिखाए। भगवत प्राप्ति के लिए मनुष्य को काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद् आिद को छोड़ कर ही भगवान मिल सकते हैं। जो इन चीजों को त्याग कर भगवत भक्ति में लगता है, उन्हें सहज ही भगवान मिल जाते हैं। जो इन चीजों में लिप्त होकर चाहे की भगवान उसे मिल जाए तो उनकी राहें बड़ी कठिन होती है। कथा सुनने बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे।
तीन वचन से मानव जीवन की उत्पत्ति
कथाके दाैरान भगवाताचार्य ने बताया कि मनुष्य जन्म के पहले भगवान नारायण ने तीन वचन लिए उसके बाद ही मानव जीवन की उत्पत्ति हुई। जिसमें पहला जन्म के बाद हमेशा सत्य का साथ देने, दूसरा परमार्थ करुंगा और तीसरा हमेंशा भगवान की भक्ति करुंगा। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन प्राप्ति के बाद इन तीनों बातों को भूल जाता है। हमें भगवान का इस जीवन के लिए धन्यवाद देना चाहिए।
नरेश भाई राज्यगुरू ने कथा वाचन किया।
श्री मद भागवत कथा को एकाग्रता से सुनती बड़ी संख्या में महिलाएं।