पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • प्लानिंग का पता नहीं, धान की मिलिंग में फिर होगी देरी

प्लानिंग का पता नहीं, धान की मिलिंग में फिर होगी देरी

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
धानखरीदी जोरों से चल रही है, इसके विपरीत परिवहन कछुआ चाल पर है। इसका सीधा असर कस्टम मी लिंग पर दिखेगा। जैसा कि पिछले सत्र हुआ है। 2014-15 की धान खरीदी शुरू हो गई है, लेकिन कस्टम मी लिंग को लेकर आखिरी समय तक जिला प्रशासन को निर्देश देने पड़े। इस बार भी मार्कफेड का कोई प्लान नहीं नजर नहीं रहा है, इस कारण कस्टम मी लिंग में समस्या आना तय लग रहा है।

पिछले साल भी धान खरीदी के दौरान उठाव में लेटलतीफी हुई थी। इस कारण कस्टम मिलिंग भी देरी हुई। इसके अलावा पीडीएस के चावल का गोलमाल भी हुआ, इस कारण प्रशासन को राइस मिलों में छापामार कार्रवाई भी करना पड़ा था। हालांकि इसका असर भी कस्टम मी लिंग में नहीं दिखा। इसके बाद भी मार्कफेड की कोई तैयारी नहीं दिख रही है। एक दिसंबर से केंद्रों में धान खरीदी शुरू हो गई है। वहीं शुरुआत में ही परिवहन को लेकर कसावट देखने नहीं मिल रही है। मिली जानकारी के अनुसार अब तक जिलेभर से केवल 73 हजार क्विंटल धान का ही परिवहन हो पाया है। इससे समिति की चिंता बढ़ी है।

तत्काल भुगतान के लिए मंडी का रुख

राज्यसरकार ने जरूर धान खरीदी का कोटा १० क्विंटल के बाद १५ क्विंटल कर दिया है। इसके बाद भी राजनांदगांव मंडी में किसानों का रूख है। बताया गया कि तत्काल भुगतान के चलते किसान धान लेकर मंडी पहुंच रहे हैं। जबकि सोसाइटी और मंडी में धान के मूल्य में ७० से १०० रुपए अंतर है।

पौने 5 लाख क्विंटल की हुई खरीदी

धानखरीदी को लेकर सप्ताहभर का समय बीत गया है। जिले की सोसाइटियों में अब तक 4 लाख 84 हजार क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी है। इसकी कीमत तकरीबन 67 करोड़ रुपए बताई गई है। वहीं लीकिंग की राशि 26 करोड़ रुपए हैं। मिली जानकारी के अनुसार सोसाइटियों में धान लेकर 14 हजार किसान पहुंच चुके हैं। आने वाले दिनों में आवक में तेजी होगी।

जिले के विभिन्न खरीदी केंद्रों में धान की आवक हो रही है।