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पुराने कैप कवर के भरोसे केंद्रों में हो रही है धान की सुरक्षा
खरीदी केंद्रों में शनिवार हुई बूंदाबांदी के बाद भी व्यवस्था नहीं की गई
जिले के खरीदी केंद्रों में धान जाम होने लगा है। वहीं पिछले तीन दिनों से मौसम में भी बदलाव हुआ है, शनिवार को हल्की बूंदाबांदी भी हुई है। इसलिए धान की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जबकि इस सत्र के लिए कैप कवर अब तक नहीं पहुंची, इसलिए पिछले साल के कवर से ही काम लिया जा रहा है। हालांकि विभागीय अधिकारी अब तक की खरीदी के हिसाब से कैप कवर पर्याप्त पर्याप्त बता रहे हैं।
अब तक जिले में 8 लाख 28 हजार क्विंटल धान खरीदा जा चुका है। वनांचल की सोसाइटियों को छोड़ दिया जाए तो जिलेभर में धान की बेहतर आवक हो रही है। दूसरी तरफ परिवहन का पता नहीं है, इसलिए समितियों में धान जाम हो गया है। वहीं जिला प्रशासन का भी इस ओर ध्यान नहीं है। इसलिए मौसम का असर धान की क्वालिटी पर पड़ सकता है। क्योंकि पहले तो धान खरीदी के समय ही इन संसाधनों की पूर्ति कर ली जानी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया इसलिए धान खरीदी की तैयारियों का आंकलन किया जा सकता है। पिछले बार भी इस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा था। इसके बाद भी इस सत्र में इस दिक्कत पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा आने वाले दिनों में कई सोसाइटियों में बारदानों की कमी आना भी तय है।
कोटाबढ़ने से आवक बढ़ी
पहलेराज्य सरकार ने धान खरीदी का कोटा प्रति एकड़ 10 क्विंटल तय कर दिया था। इसे लेकर किसानों में काफी आक्रोश भी दिखा। शुरुआती दिनों में खरीदी केंद्रों में धान की आवक भी नहीं हुई। इसके बाद कोटा बढ़ाकर 15 क्विंटल कर दिया गया। फिर ही केंद्रों में धान लेकर बड़ी संख्या में किसान पहुंचने लगे। दो सप्ताह में जिले में 8 लाख क्विंटल से अधिक का धान खरीदा जा चुका है। जबकि अब भी खरीदी के लिए 45 दिन बचे हैं। इसमें भी धान की बंपर आवक की उम्मीद बनी हुई है।
खरीदी केंद्रों में बोरों को रखने की उचित व्यवस्था भी नहीं है।
पड़ोसी राज्यों की आवक पर नजर
धानखरीदी शुरू होने से पहले किसानों का पंजीयन जरूर हो गया है। इसके बाद भी पड़ोसी राज्यों से धान की खेप आने को नकारा नहीं जा सकता है। क्योंकि पहले भी बिचौलिए स्थानीय किसानों के माध्यम से धान बेचते थे। इसलिए अब बिचौलियों की नजर उन किसानों पर है, जिनकी पैदावार कम हुई है या फिर उन्होंने पंजीयन कराया है, लेकिन बोनी नहीं की है।
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