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गरीब की सेवा करने से मिलते हैं भगवान

7 वर्ष पहले
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वृंदावन धाम स्टेट हाईस्कूल प्रांगण में कान्हा महिला मंडल द्वारा आयोजित संगीतमय भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के सातवें दिन व्यासपीठ पर बैठे भागवताचार्य पं. नरेशभाई राज्यगुरु ने सुदामा भगवान कृष्ण की मित्रता का सुंदर बखान किया। उन्होंने कथा बताया कि किस प्रकार निर्धन, असहाय की सेवा से भगवान की प्राप्ति होती है।

जैसे भगवान ने अपने निर्धन मित्र सुदामा से मिलकर उनके कष्टों को हर लिए, उसी प्रकार एक बार भगवान की सच्चे मन से प्रार्थना करने, सेवा, निर्धन की सेवा करने से प्रभु की प्राप्ति होती है। कथा में उन्होंने सुदामा के भावार्थ बताए सुदामा तीन अक्षरों में सु का अर्थ शुभ दर्शन, दा का अर्थ दयावान और तीसरे अक्षर मा का अर्थ मां प्रेम देने वाली के रूप में बताया। भागवताचार्य ने राज्यगुरु महाराज ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने दांतों का प्रयोग दो बार किया जिसमें प्रथम जब उनके माता-पिता जेल की कोठरी में बंद थे तो उन्हें आजाद करने दूसरी बार सुदामा के चरणों से कांटे, कंकड़ आदि निकालने में प्रभु ने दांतों का उपयोग किया। भगवान ने सुदामा के घावों को आंसू धोकर गरीबों की सेवा के संदेश दिए है। निर्धनों की सेवा करने से मनुष्यों के सारे कष्टों का नाश होता है। प्रभु की इस सेवा से उन्हें भक्त वात्सल्य भगवान कहा जाता है।

आज समापन होगा

महिलामंडल द्वारा आयोजित भागवत ज्ञान सप्ताह में रविवार को हवन, पूजन, अतिथि, कन्या, ब्राहम्ण भोजन महाप्रसादी के साथ समापन होगा। इसके साथ ही 7 दिसंबर से 14 दिसंबर तक चलने वाली भागवत कथा का समापन हो जाएगा।