रिकार्ड में सोयाबीन, मौके पर खेती नहीं
राजनांदगांव|प्रशासन कोदी गई रकबे की जानकारी में कृषि विभाग ने बड़ा फर्जीवाड़ा किया। रिकार्ड में हजारों हेक्टेयर दलहन, तिलहन और सोयाबीन की खेती के लिए दिया गया रकबा ही फर्जी निकला। एसडीएम बीएल गजपाल ने बुधवार को आधा दर्जन गांवों का जायजा लिया तो मौके पर सोयाबीन की खेती ही नहीं मिली। जबकि कृषि विभाग ने सोयाबीन के लिए उन्हीं गांवों में रकबा होना बताया है। अब प्रशासन द्वारा रिकार्ड को दुरुस्त करने का काम शुरू किया जाएगा।
धान खरीदी के लिए खाद्य विभाग द्वारा की गई रकबे की एंट्री में गड़बड़ी सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच-पड़ताल शुरू कर दी। भास्कर ने बुधवार के अंक में 31 गांवों का रकबा गायब होने की खबर प्रकाशित की। इसके बाद एसडीएम गजपाल को कलेक्टर अशोक अग्रवाल ने मौके पर जांच के लिए भेजा। एसडीएम ने पार्रीकला, नवागांव, मुढ़ीपार, मनगटा और जोरातराई में सोयाबीन के रकबे की जानकारी ली। रिकार्ड में इन गांवों में सोयाबीन बोने की जानकारी तत्कालीन डीडीए आरके राठौर द्वारा राजस्व विभाग को दी गई थी।
जांच-पड़ताल के दौरान पाया गया कि इन गांवों में सोयाबीन की खेती ही नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि इसी वजह से धान का रकबा प्रभावित हो रहा है। दलहन-तिलहन और सोयाबीन का रकबा नौ हजार हेक्टेयर में बताया गया है। जबकि इतनी बोनी की ही नहीं गई है। कृषि विभाग द्वारा दिए गए रकबे की पूरी जांच की जाएगी। रकबे में सुधार किया जाएगा। ताकि आने वाले समय में किसानों का पंजीयन प्रभावित हो। यदि और गड़बड़ी सामने आई तो विभागीय अमले पर कार्रवाई भी की जाएगी।
जांच के बाद होगा पंजीयन
आवेदन पत्रों को इस बार स्कैन करना है। इसी वजह से एक आवेदन की इंट्री में करीब दस मिनट तक का समय लग रहा है। इसी वजह से किसानों को परेशानियां झेलनी पड़ रही है। कई किसान तो मायूस होकर लौट रहे हैं। बढ़े हुए रकबे वाले किसानों का आवेदन एक अक्टूबर से लिया जाएगा। बताया गया कि तहसीलदार के माध्यम से उनके रकबे की जांच-पड़ताल की जाएगी। इसके बाद ऐसे किसानों का पंजीयन होगा।
^तत्कालीन डीडीए ने जो रकबा दिया था, वह गलत है। मौके पर की गई जांच में यह गड़बड़ी सामने आई है। आधा दर्जन गांवों में सोयाबीन की खेती ही नहीं की गई है, जबकि रिकार्ड में रकबे को दर्शाया गया है।\\\'\\\' बीएलगजपाल, एसडीएम
17 सितंबर को प्रकािशत खबर
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