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फर्नीचर बनाने अफसरों ने काट लिए सागौन के पेड़

6 वर्ष पहले
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मोहलाइलाके के पानाबरस में सागौन पेड़ों की अवैध कटाई और उसका परिवहन करने के मामले में विभागीय अफसर लपेटे में गए हैं। मामले की जांच शुरू हो गई है, इसमें चौकी बिसरुराम ने अपने बयान में साफतौर पर कहा कि बीट गार्ड डीके हनौटे को घर के लिए फर्नीचर बनाने थे, इसलिए लकड़ियों को उनके घर भेजा जा रहा था। इसके अलावा अन्य अधिकारी भी मामले को लेकर गोलमोल जवाब दे रहे हैं, इस कारण सभी संलिप्तता को नकारा नहीं जा सकता।

जांच के पहले चरण में ही साफ हो गया है कि पानाबरस के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से ही पेड़ों को काटने और उसके परिवहन का खेल चल रहा था। उसके आधार पर जांच रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई है, मतलब सीधे-सीधे अधिकारी इस मामले में फंस गए हैं। अब देखना होगा दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी। इधर सागौन के एक पेड़ की लकड़ी को वन विभाग के अमले ने बरामद कर लिया है, जबकि अन्य तीन पेड़ भी उन्होंने अपने सुपुर्द कर लिया है। यह पहला मामला नहीं है, जब जंगल में अवैध कटाई पर अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई हो, यह जरूर है कि पहली मर्तबा इसका खुलासा हुआ है। पानाबरस के रेंजर, डिप्टी रेंज और बीट गार्ड इस मामले में बोलने से भी कन्नी काटते दिख रहे हैं।

ऐसाहै पूरा मामला

अवैधकटाई की सूचना पर 6 फरवरी को एसडीएम मोहला रजत बंसल कौड़ीकसा डिपो पहुंचे, उन्हें देखते ही पानाबरस के डिप्टी रेंजर सुभाष मिश्रा बिना कुछ कहे निकल गए। उस वक्त वहां वन विभाग ने डिप्टी रेंजर कमल नारायण साहू भी थे, उन्होंने बताया कि सागौन के 1 पेड़ की लकड़ियां देवरसुर निवासी मनराखन के पैरावट से बरामद की गई है। उसका पंचनामा तैयार किया जा रहा है। पूछताछ में सामने आया कि पानाबरस का चौकीदार बिसरुराम के कहने पर नई ट्रैक्टर से प्रति ट्रिप 1 हजार रुपए लाने कहा गया था। इसके बाद बिसरुराम ने अपने बयान में कहा कि पानाबरस क्षेत्र क्रमांक 373 के डिप्टी रेंजर मिश्रा और बीट गार्ड डीके हनौटे के कहने पर रतन कोठार से देवरसुर लाई गई।

जंगल में जारी है अवैध कटाई, बचे हैं ठूंठ ही ठूंठ।

नंबरिंग का पता हैमरिंग का

जिन3 सागौन के पेड़ों को जब्त किया गया है, उनमें नंबरिंग और हैमरिंग नहीं की गई है। नियमों के मुताबिक बिन इस प्रक्रिया के परिवहन, लावारिस छोड़ना और ट्रांजिट पास अन्य काम करना पूरी से अवैध है। रेंजर चौबे ने कहा कि यह काम विधिक रूप (पीओआर) से किया गया है। जबकि बिना नंबरिंग हैमरिंग का पीओआर बनाना संभव ही नहीं है। इसलिए भी मामला पूरी तरह से उजागर हो गया है कि अधिकारियों-कर्मचारियों ही शह पर अवैध कटाई की जा रही थी।

एक पेड़ काटा, चार गिरे मिले

क्षेत्र373 पानाबरस का इलाका है। यहां एक सागौन पेड़ को काट दिया गया था, लकड़ी के पांच टुकड़े जब्त भी किए गए। इसके अलावा चार अन्य पेड़ गिरे हुए मिले। उन्हें भी वन विभाग को सुपुर्द कर दिया गया है। मतलब साफ है कि पेड़ को काटने का काम जंगल में जोरों से किया जा रहा है। इसमें अब रेंजर मुकेश चौबे की भूमिका भी संदिग्ध नजर रही है। जांच के दौरान और भी विभागीय अधिकारियों के नाम इस मामले से जुड़ सकते हैं।

^जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है। उसे कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव वन विभाग को भेज दिया गया है। इसमें सागौन के पेड़ों की कटाई और परिवहन होने की बात जांच रिपोर्ट में आई है। अशोकअग्रवाल, कलेक्टर

{पानाबरस रेंजर मुकेश चौबे का कथन विरोधाभाषी है। पहले उन्होंने कहा कि चौकीदार से गलती हो गई, दूसरे दिन कहा कि 3 फरवरी का पीओआर बना हुआ है। इस तरह अलग-अलग बातें रेंजर चौबे के द्वारा कही गई।

{डिप्टी रेंजर सुभाष मिश्रा का कौड़ीकसा वन डिपो से चला जाना भी, संदेहास्पद है। उन्हीं के निर्देशों पर चौकीदार बिसरुराम ने लकड़ियों को देवरसुर लाया, यह कथन में चुका है।

{बीट गार्ड डीके हनौटे को बुलाया गया, पर वे उपस्थित नहीं हुए। चौकीदार ने हनौटे के घर के लिए लकड़ी ले जाना कबूल किया है।

^मामले की जांच कर ली गई है। मामले में अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई है, इसे जांच में भी स्पष्ट लिख दिया गया है। जांच रिपोर्ट कलेक्टर को भी सौंप दी गई है। रजतबंसल, एसडीएम, मोहला