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जीवन जीने की कला सिखाते हैं संत महापुरुष : अखिलेशानंद

6 वर्ष पहले
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दिव्यज्योति जागृति संस्थान की ओर से नया बस स्टैंड पर रविवार को सत्संग हुआ।

स्वामी अखिलेशानंद ने कहा कि संत महापुरुषों को जीवन जीने की कला सिखाते हैं। इसलिए अनादिकाल में बच्चों को गुरुकुल भेजा करते थे, जहां गुरु उसे पढने अपने से बड़ों से समाज में कैसे व्यवहार करना हैं यह सिखाते थे। लेकिन आज धीरे-धीरे भारतीय संस्कृति समाप्त होती जा रही है। संसार में रिश्ते केवल मतलब के ही रह गए हैं। जब तक स्वार्थ पूरा हो रहा है तक तक ही आपके रिश्तेदार है। ऐसी मतलबी दुनिया में जीना है तो गुरु का साथ आवश्यक है अर्थात गुरु के बताए रास्ते में चलना होगा।

उन्होंने कहा कि संत महापुरुष नहीं होते तो संसार जल कर राख हो गया होता। हमें अभी केवल शिष्य बनने के रास्ते मिले हैं, शिष्य बने नहीं हैं। आशुतोष महाराज हमें दीक्षा दिए हैं। महाराज के बताए मार्गों पर चलकर ही शिष्य बन सकते हैं और हमें गुरु की कृपा प्राप्त हो सकती हैं। स्वामी दर्शनानंद ने नवधा भक्ति की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि ईश्वर प्राप्ति करना है तो संत की शरण में जाना होगा और कथा का संग करना पडे़गा। स्वामी रामप्रकाश नंद ने भजन की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में दिव्य ज्योति जागृति परिवार का योगदान रहा।