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किसानों की मेहनत पर कीट प्रकोप का साया

7 वर्ष पहले
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सक्ती|पर्याप्त मेंबारिश होने के बाद जहां खेती किसानी बेहतर ढंग से हो गई वहीं अब जब फसल खेतों में लहलहाने की बारी आई है तब विभिन्न प्रकार की बीमारी घेरने लगी है। क्षेत्र के ग्रामीण किसान अपनी फसल में कीट प्रकोप से परेशान हैं। फसल में झुलसा, तना छेदक, माहो सहित कई प्रकार की बीमारियां शुरू हो गई हैं। किसान फसलों को बीमारी से बचाने कीटनाशक दवाईयों का छिड़काव कर रहे हैं मगर उचित मार्गदर्शन के अभाव में दवा का चयन नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते दवा बेअसर हो रही है।

सक्ती ब्लाक के अधिकांश किसानों ने खुर्रा बोनी, लेई रोपा पद्धति से धान की बोनी कर ली थी जिसके बाद बियासी निंदाई काम पूरा किया गया। इस दौरान बीज खाद में काफी पैसे खर्च करने के बाद किसानों पर फिर से खर्चों की आफत गई है क्योंकि उनके खेतों में कीटों का प्रकोप शुरू हो गया है। डोड़की, नंदौरखुर्द, जाजंग, नंदौरकला, सोठी, जामपाली, रगजा, पोरथा, सकरेलीकला सहित अन्य गांवों के खेतों में धान फसल पर झुलसा, सीथ ब्लास्ट, तना छेदक, भूरा माहो जैसे बीमारी का प्रकोप शुरू हो गया है। डोड़की के किसान रामचरण गबेल और योम प्रकाश लहरे ने बताया कि स्वर्णा, 1001, श्रीराम 453 जैसे धान के पौधों में झुलसा रोग लग गया है, इससे पौधों का विकास नहीं हो पा रहा है। इसके रोकथाम के लिए साइबर मेंथीन दवा का छिड़काव कर रहें है। सकरेलीकला के किसान संतोष कुमार यादव सेतराम यादव ने बताया कि इन बीमारी के अलावा पौधों के जड़ों में भी कीट प्रकोप होने लगा है। जामपाली के किसान भुवनेश्वर कुर्रे संतराम ने बताया कि धान के पत्तों में तना छेदक की बीमारी हो गई है। इसके रोकथाम के लिए उनके द्वारा काफी खर्च किया जा चुका है फिर भी बीमारी नियंत्रण से बाहर है। जामपाली के किसान कामता प्रसाद चंद्रा राजेन्द्र गबेल सहित अन्य किसानों का कहना है कि उन्हें विभाग का उचित मार्गदर्शन नहीं मिल रहा है, जिसके कारण कई किसान फोरेट को यूरिया के साथ डाल रहे जिसका दुष्प्रभाव भूमि पर पड़ रहा है। भूमि की उर्वरा के साथ-साथ केंचुआ किसान मित्र किट जीव-जन्तु नष्ट हो रहे हैं। डोड़की भाठापारा के कृषक योम प्रकाश लहरे का कहना है कि तनाछेदक की रोकथाम के लिए डाईजोफास डेल्टा मेथीन टाईसाइकोन अन्य कीटनाशक दवा का उपयोग अधिकांश किसानों द्वारा किया जा रहा है। कृषि विभाग का मैदानी अमला गांवों से गायब है। कभी-कभार ही इन