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बच्चों को कानून के साथ नैतिक शिक्षा भी देनी चाहिए
जीवनके प्रारंभिक पच्चीस वर्ष तक की आयु में कड़ी मेहनत ईमानदारी से विद्या अध्ययन कर विद्यार्थी अपने भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। लक्ष्य प्राप्त कर बाकी जीवन को आसानी से आरामदायक ढंग से व्यतीत कर सकते हैं।
इसलिए विद्यार्थियों को अपने अध्ययन काल में सिर्फ विद्या अर्जन पर ही एकाग्रता पूर्वक ध्यान देना चाहिए। ये बातें तहसील विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सक्ती बीपी वर्मा ने ग्राम सकरेली कला शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल में आयोजित विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को स्कूलों में नैतिक एवं शारीरिक शिक्षा भी दी जानी चाहिए। गरीबी के कारण कोई भी न्याय प्राप्त करने से वंचित नहीं हो सकता। गरीबों के कोर्ट फीस, वकील नियुक्ति की व्यवस्था शासन द्वारा की जाती है, इसके लिए आवश्यक जानकारी सक्ती स्थित व्यवहार न्यायालय प्रांगण में रिटेनर अधिवक्ता से मिलकर प्राप्त किया जा सकता है। श्री वर्मा ने आगे कहा कि चोरी का माल खरीदने से बचें, इससे लोग परेशानी में फंस सकते हैं। महिलाओं को मजबूत बनने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि महिलाएं अप्रिय स्थिति का सामना मजबूती से करने के लिए शारीरिक मानसिक रूप से तैयार रहें। द्वितीय अपर जिला सत्र न्यायाधीश जितेन्द्र कुमार जैन ने कहा कि विद्यार्थियों का यह विद्या अध्ययन का महत्वपूर्ण समय है उनके जीवन का यह नींव तैयार करने का समय है। विद्यार्थी इस अवस्था में जितनी मेहनत करेंगे , जीवन में उतनी ही सफलता प्राप्त होगी। श्री जैन ने आगे कहा कि अशिक्षा एवं शराब ही बुराइयों की जड़ है। लोगों को शिक्षित करने के साथ ही शराब के दुष्परिणामों के बारे में बताने की आवश्यकता है। व्यवहार न्यायाधीश वर्ग दो यशोदा कश्यप ने महिलाओं से संबंधित विभिन्न कानूनों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महिलाएं पैतृक संपत्ति में बराबर के हिस्सेदार हैं। उन्हें अपने भाईयों अथवा बहनों के साथ पैतृक संपत्ति में बराबर हिस्सा प्राप्त होगी। प|ियों को अपने पति से भरण पोषण प्राप्त करने का अधिकार है तथा उन्हें उनके पति अथवा ससुराल के लोग घर से नहीं निकाल सकते उन्हें उसी मकान में रहने एवं अलग कमरा प्राप्त करने का अधिकार है। प|ियों को उनके पति के संपत्ति एवं उनके वेतन पर भरण पोषण प्राप्त करने का अधिका