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महिलाओं के शिक्षित होने से अपराध घटेंगे

6 वर्ष पहले
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जहांमहिलाएं सम्मानित और सुरक्षित होती है, वहां अपराध होने की संभावना नगण्य होती है। महिलाओं काे अपनी सुरक्षा के लिए शिक्षित और अधिकारों के लिए जागरूक होना पड़ेगा।

ये बातें तहसील विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष एवं प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश बीपी वर्मा ने शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल नंदौरकला में आयोजित विधिक जागरूकता शिविर में कही। उन्होंने कहा कि पैतृक संपत्ति में महिलाओं को भी जन्म से पुरूषों की तरह अधिकार होता है। किसी महिला को प्रताड़ित करना अपराध है। दहेज या टोनही प्रताड़ना अधिनियम भी महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। न्यायाधीश ने कहा कि आजकल मोबाइल के माध्यम से अपराध ज्यादा हो रहे हैं, इसीलिए अपना मोबाइल किसी को देने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि जो मोबाइल उपयोग कर रहा है वह कोई आपराधिक कृत्य तो नहीं कर रहा। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश जेके जैन कहा कि हमारे समाज में जब तक अशिक्षा और शराब रहेगी तब तक हम अपराध से लड़ने में सक्षम नहीं होंगे इसलिए हर व्यक्ति को शिक्षित होना आवश्यक है। शासन ने ऐसे प्रावधान किए है, जिसमें 14 वर्ष तक के हर बालक-बालिका को निशुल्क शिक्षा देना अनिवार्य किया है। उन्होंने कहा कि शराब के नशे में लोग अपना आपा खो बैठते हैं जिसके कारण अपराध बढ़ रहे हैं। छात्र-छात्राओं को कहा कि अभी पढ़ने का समय है इसलिए सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दें। प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट अगम कुमार कश्यप ने कहा कि किसी घटना की सूचना पुलिस थाने में तत्काल की जानी चाहिए, विलंब से रिपोर्ट कराने पर संदेह उत्पन्न होता है। शिविर को अधिवक्ता गिरधर जायसवाल, एआरखान, राकेश रोशन महंत ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर प्राचार्य एमबी खुंटे समेत विद्यार्थी और शिक्षक उपस्थित थे।

मंचस्थ न्यायाधीश अन्य अतिथि।