खेतों में लहलहाने लगी सरसों
सक्ती| रबी सीजन के दौरान ब्लाक के डोड़की, रगजा, मसनिया, बरपाली जैसे गांवों में किसानों द्वारा बहुतायात में सरसों की खेती की गई है। अब सरसों के फूल निकल आए हैं और खेतों ने पीली चादर ओढ़ ली है। डोड़की के किसान योमप्रकाश लहरे ने बताया कि सरसों फसल 60 दिन में खेत से निकल आती है। प्रति हेक्टेयर 2 से 3 क्विंटल तक उत्पादन होता है। इसमें लागत मेहनत कम ही लगती है। रबी सीजन के दौरान ब्लाक में कभी बड़ी मात्रा में लगने वाली सरसों की फसल के रकबे में अब समय के साथ कमी रही है। इसका कारण गेहूं की फसल का रकबा बढ़ना है। गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष सरसों की बोनी महज 10 प्रतिशत रकबे में हुई है। ब्लाक के गांवों में 10 वर्ष पूर्व तक सैकड़ों हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की फसल ली जाती थी। किसान उपज बेचने के साथ घरेलू उपयोग में लेते थे। लेकिन समय के साथ उचित भाव नहीं मिलने से किसानों का रुझान सरसों की खेती की ओर से घटने लगा है।