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बिछलवा नाला का रपटा बहा, आने-जाने में परेशानी
संकरीऔर नवापारा के बीच पड़ने वाले बिछलवा नाला का रपटा नाले में बरसात में एक बार पानी चलने के बाद मिट्टी मुरम बह जाने के कारण टूट गया जिससे इस मार्ग पर चलने वाले लोगों के लिए पुल से गुजरना जोखिम भरा हो गया है।
भैंसा, संकरी एवं करेली पंचायत की साढ़े 6 हजार की आबादी को नवापारा से जोड़ने वाले इस नाले पर पुल बनाने की मांग को लेकर नेताओं जनप्रतिनिधियों एवं जनसमस्या निवारण शिविरों में यह मुद्दा उठाने तथा दो साल तक ग्राम सुराज का बहिष्कार करने के बाद भी पुल नहीं बन सका है।
करेली के भानुप्रताप कोसले, विनोद बघेल एवं संकरी के मेहतरु एवं प्रहलाद वर्मा ने बताया कि भैंसा,संकरी एवं करेली के 50-60 बच्चे हाईस्कूल में में पढ़ने जाते हैं। वहीं खाद,ऋण, किराना, के लिए समिति मुख्यालय केशली एवं नवापारा जाना पड़ता है। बरसात के दिनों में बिछलवा नाला के रपटे से एक बार पानी चलने के बाद उसका मिट्टी मुरम बह जाता है। इसके बाद बोल्डर भरे नाले को पार करना खतरनाक हो जाता है। लोगों ने बताया कि सर्वाधिक परेशानी बरसात के मौसम में खाद लाने एवं धान कटाई के बाद बोझा ढुलाई के समय होती है। किसानों को पुल के उस पार के खेतों में बीड़ा लाना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार सतभांवा से नवापारा तक के कच्चे मार्ग एवं पुल निर्माण के बाद नवापारा तक कच्चे मार्ग एवं पुल निर्माण के बाद नवापारा एवं आस-पास के गांवों के लिए तिल्दा नेवरा की दूरी काफी कम हो जाएगी। अभी उक्त गांवों के लोगों को हतबंध होकर 20-22 किमी की दूरी तय करना पड़ता है जो मात्र 12-15 किमी रह जाएगी।
सरपंच धर्मेंद्र बघेल ने बताया कि हर साल बरसात के बाद मूलभूत राशि नाला निर्माण में खर्च हो जाता है। नेता उसी मार्ग से गुजर कर गांव में आते है। बलौदाबाजार विधायक जनकराम वर्मा ने ग्रामीणों को कुछ दिन धीरज रखने की सलाह दी है। ग्रामीणों का कहना है कि मांग पूरा होने का इंतजार ही किया जा सकता है।
सुहेला. बिछलवा नाला के खतरनाक गड्ढे से गुजरती छात्रा।