हर समिति में खरीदी की मात्रा अलग-अलग
सप्ताहभर तक बहिष्कार के बाद सरकार द्वारा प्रति एकड़ 15 क्विंटल धान खरीदी की जानकारी मिलने पर सोमवार को खरीदी केंद्र में बड़ी संख्या में किसान अपना धान लेकर बेचने आए। खरीदी केंद्रों में किसान पहले तौल कराने की होड़ में सुबह से ही खरीदी केंद्रों पर पहुंच गए थे। 7 बजे के पहले जब गेट खुला भी नहीं था, धान भरे वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। कांटा बाट की दिन भर की क्षमता और बारदाना वितरण के बाद शेष कृषकों को मायूस लौटना पड़ा।
इस साल धान खरीदी को लेकर अनिश्चतता एवं अफवाहों का बाजार गर्म है। पहले प्रति एकड़ 15 क्विंटल की बात कही गई। इसके बाद केवल सहकारी समितियों के ऋणी कृषकों का ही 15 क्विंटल अन्य का 10 क्विंटल ही धान खरीदे जाने की बात कही गई। सोमवार को सहकारी समितियों के कंप्यूटर डाटा से मिली जानकारी के अनुसार प्रत्येक गांव के लिए अलग-अलग मात्रा में धान खरीदी की जाएगी। स्थानीय सहकारी समिति के सुहेला, बासीन, रानी जरौद, खपराडीह, पड़कीडीह, चंडी करही में प्रति एकड़ अलग-अलग मात्रा में धान खरीदी की जाएगी। सोमवार को सुहेला खपराडीह खरीदी केंद्र में 2-2 हजार बोरी, मोहरा में 4500 बोरी, भटभेरा में 2500 बोरी, रावन में 3000, शिकारी केशली में 2700 बोरी धान खरीदी गया। समाचार लिखे जाने तक धान का तौल जारी था इसलिए कितने क्विंटल धान की खरीदी हुई है इसकी जानकारी नहीं मिल पाई।
समिति एवं बैंक अधिकारियों के अनुसार धान खरीदी की अलग-अलग मात्रा हल्का पटवारियों द्वारा शासन को भेजी गई अनावारी रिपोर्ट के आधार पर प्रत्येक गांव को दी गई है।
भ्रम फैला रहे एडीएमओ
बलौदाबाजारके एडीएमओ मनोज बघेल ने इस संबंध में बताया कि प्रत्येक समिति के डाटा एंट्री ऑपरेटरों द्वारा सोसायटी के साफ्टवेयर का नया वर्जन 16.1 डालने से धान की मात्रा में सुधार आएगा। ऐसा कहकर उन्होंने कृषकों को पुन: भ्रमित करने का प्रयास किया है। इसके पहले उन्होंने यह कहा था कि मामले की जानकारी खाद्य विभाग दे सकता है।
सुहेला. धान खरीदी केंद्र के बाहर धान लेकर आई गाड़ियों की लगी कतार।