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सुहेला में जगह-जगह लगाए गए पौधों से बढ़ी हरियाली

6 वर्ष पहले
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कोईभी काम मिल जुलकर सब करें तो उसका परिणाम सुखद होता है। क्षेत्र में पिछले तीन चार सालों में किए गए पौधारोपण का परिणाम अब क्षेत्र की सड़कों जगह-जगह हरियाली के रूप में दिखने लगा है।

रमन सरकार के पिछले कार्यकाल में गांव-गांव में बड़े पैमाने पर पौधारोपण कराया गया था। इस भले ही सफल नहीं हुआ लेकिन इससे लोग जागरूक हुए तथा उसके बाद कई जगह लोगों ने संस्थाओं द्वारा पौधारोपण किया गया। इसका परिणाम अब दिखाई देने लगा है। वर्तमान में सुहेला से बलौदाबाजार मार्ग के दोनों किनारे तीन साल पहले लगाए गए छातिम के पौधे पड़कीडीह, करही गांव के बीच पेड़ हो गए हैं। वन विभाग द्वारा सुहेला मोहरा खरोरा मार्ग पर बुड़गहन तक किए गए पौधारोपण भविष्य हरियाली की आस जगा रहे हैं। अल्ट्राटेक सीमेंट द्वारा सुहेला भाटापारा मार्ग पर पौधारोपण कर लगाए जा रहे ट्री गार्ड मन को सुकून देते हैं कि पौधों को कुछ नहीं होगा। आने वाले वर्षों में ये पौधे पेड़ की शक्ल में छांह देंगे।

क्षेत्र में स्काउट एवं गाइड द्वारा सुहेला झीपन मार्ग तथा खल्लारी मंदिर प्रांगण में, आयुष्मान रक्तदाता संघ द्वारा सुहेला तथा खरोरा मार्ग पर एवं सुहेला भाटापारा मार्ग को जोड़ने वाले बायपास मार्ग पर लगाए गए पौधे बड़े हो रहे हैं। अल्ट्राटेक प्रबंधन द्वारा सुहेला भाटापारा मार्ग के दोनों किनारे 5-5 मीटर के अंतराल में 17 किमी तक नीम, शीशम, पेंड्राफार्म, धानबहार, बकपान आदि किस्म के 3380 पौधे लगाए हैं। संयंत्र के भूतल विभाग के डीजीएम संदीप पांडेय ने बताया कि जहां पर्याप्त जगह मिली वहां पर तीन चार कतार में पौधे लगाकर तार घेरा जा रहा है। वहीं जहां जगह की कमी है पौधों के लिए ट्री गार्ड लगाया जा रहा है।

वन विभाग के विजय ध्रुव ने बताया कि ढाई किमी तक सड़क किनारे बरन, जामुन, आम, बरगद, पीपल, नीम, कचनार, डेल्टाफार्म, कदंब, बादाम, अमलतास, गुलमोहर आदि 2000 पौधे लगाए गए हैं। आयुष्मान रक्तदाता संघ द्वारा केवल नीम के पौधे ही लगाए गए है तो स्काउट्स गाइड के ईनूराम ने आंवला, नीम, जामुन, शीशम, गुलमोहर, पीपल,कनेर के पौध लगाए हैं। थाना परिसर में लगाए गए पौधे अब पेड़ बन चुके हैं। बलौदाबाजार मार्ग पर लगाए गए छातिम के पौधों को भी अब देखरेख पानी की जरूरत नहीं रह गई है।

वन विभाग ने इन पौधों की देखरेख पानी के लिए पांच मजदूरों की व्यवस्था की गई है। वहीं अल्ट्राट्रेक द्वारा पानी के लिए टैंकर की व्यवस्था की गई है।

सुहेला. सुहेला-भाटापारा मार्ग पर लगाए गए पौधे।