बढ़त के बावजूद भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं
जिला पंचायत चारों जनपद पंचायत में अध्यक्ष उपाध्यक्ष पद के लिए खींचतान शुरू हो गई है। पद के दावेदार अपने-अपने समर्थक सदस्यों को जुटाने में लगे हुए हैं।
13 फरवरी को जनपद अध्यक्ष उपाध्यक्ष का चुनाव किया जाना है। नवनिर्वाचित सदस्य ही अपने बीच से अध्यक्ष उपाध्यक्ष चुनेंगे। जिला पंचायत में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जिपं अध्यक्ष, उपाध्यक्ष चुनाव 18 फरवरी को होने वाले सम्मिलन में किया जाएगा।
जिला पंचायत की 10 सीट में से सबसे ज्यादा 5 सीट हासिल करने के बावजूद पूर्ण बहुमत नहीं मिलने से भाजपा अध्यक्ष पद को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। सीपीआई समर्थित 3 और कांग्रेस समर्थित 2 सदस्य जीतकर आए हैं। दोनों दलों बीच समझौता होने पर भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती है। ऐसे में अगर भाजपाई खेमे से कम से कम 1 सदस्य को विपक्षी गठबंधन ने अपने पाले में कर लिया, तो अध्यक्ष का पद भाजपा के हाथ से छिन सकता है। दिलचस्प रहा बीता कार्यकाल
अध्यक्ष उपाध्यक्ष दोनों ही वर्तमान सुकमा जिले से चुने गए थे। जिला विभाजन के बाद भी दोनों जिलों के सदस्य जिला पंचायत में बने रहे। हाल ही में सुकमा के लिए पृथक जिपं का गठन हुआ है। पहली बार चुनाव भी कराया गया है।
कमान कमला को या विमला को ?
एसटीमहिला के लिए आरक्षित होने से भाजपा पक्ष से इस वर्ग की इकलौती सदस्य कमला विनय नाग का अध्यक्ष बनना तय है। सीपीआई कांग्रेस का गठजोड़ बनने पर सीपीआई समर्थित विमला सोरी अध्यक्ष पद की प्रमुख दावेदार होंगी।
फिफ्टी-फिफ्टी का समझौता नाकाम
दिलचस्पबात यह है कि बीते चुनाव में अविभाजित दंतेवाड़ा जिले में सीपीआई को रोकने भाजपा कांग्रेस ने हाथ मिलाया था। समझाैते के तहत अध्यक्ष पद कांग्रेस भाजपाई सदस्य के बीच ढाई-ढाई साल कार्यकाल में बांटना तय हो गया। भाजपा की ओर से जमुना मांझी को अध्यक्ष बनाया गया। उपाध्यक्ष कांग्रेस के बोड्डू राजा को चुना गया। समझौते के तहत ढाई साल का समय पूरा हाेने पर कांग्रेस की सुलोचना वट्टी(महेंद्र कर्मा की पुत्री) को अध्यक्ष बनाया जाना था। लेकिन भाजपा वादे से मुकर गई। जमुना ने अध्यक्ष पद नहीं छोड़ा। इस बार ऐसे समझौते की संभावना नहीं बन रही है।