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मशीनों का फायदा नहीं मिल रहा किसानों को

7 वर्ष पहले
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धानकी मिंजाई में इस्तेमाल होने वाले थ्रेसर की डिमांड ज्यादा है। मजदूरों की कमी के चलते किसान समय की बचत के लिए थ्रेसर का उपयोग करने लगे हैं, लेकिन केंद्र के पास उपलब्ध दो थ्रेसरों से मिंजाई कराने के लिए काफी इंतजार करना पड़ रहा है।

मशीनों की कमी

गीदमस्थित ब्रांच में कल्टीवेटर-7, रोटावेटर- 5, थ्रेसर- 4, व्हील डोजर- 2, डिस्क हेरो- 2, सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल-2, प्लाऊ-5 , ट्रैक्टर इंजन-7 उपलब्ध हैं, जो नाकाफी हैं। सुकमा-बीजापुर जिले में भी ब्रांच उपलब्ध नहीं होने चलते इसी ब्रांच से ले जाए जाते हैं।

दंतेवाड़ा|कृषि अभियांत्रिकीविभाग के उपकरणों का पूरा फायदा किसानों को नहीं मिल पा रहा है। विभाग जिला मुख्यालय की बजाय गीदम में ब्रांच संचालित कर रहा है, जिससे गीदम ब्लॉक के किसान ही उपकरण किराए पर ले जा रहे हैं, जबकि दंतेवाड़ा, कुआकोंडा और गीदम ब्लॉक के किसान ब्रांच के फायदों से वंचित हैं।

दो साल पहले ब्रांच की शुरूआत गीदम-बीजापुर मार्ग पर बीआरओ के खाली पड़े कैंपस में की गई थी। जमीन समतलीकरण के लिए डोजर, ट्रैक्टर, मिट्‌टी पलटने वाले हल, थ्रेसर जैसे उपयोगी मशीनें ब्रांच में उपलब्ध हैं। फसल तैयारी के लिए जुताई से लेकर समतलीकरण तक का काम रियायती दर पर हो जाता है, जो बाजार भाव के मुकाबले एक तिहाई से लेकर आधी है। इसके पहले कृषि अभियांत्रिकी की मशीनें जगदलपुर स्थित संभागीय दफ्तर में ही उपलब्ध थीं, जिसके चलते किसानों को मशीनों के आने-जाने में लगने वाला परिवहन व्यय भी महंगा पड़ता था। इसे देखते हुए कलेक्टर केसी देवसेनापति ने जिला स्तर पर इसका ब्रांच शुरू करने की पहल की, लेकिन गीदम में मशीनों को रखे जाने से अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है।