लांस नायक....
लांस नायक....
हरिद्वार में महामृत्युंजय जाप : हनुमंतप्पा की सलामती के लिए देशभर में दुआएं हो रही हैं। हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की यज्ञशाला में छात्रों और शिक्षकों ने यज्ञ व महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया। दिल्ली, मुंबई बेंगलुरू समेत कई शहरों में प्रार्थना सभाएं हुईं। इलाहाबाद में स्कूल बच्चों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर प्रार्थना की।
खुद ही संघर्ष वाले क्षेत्रों में पोस्टिंग लेते रहे हनुमंतप्पा : सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘हनुमंतप्पा 2002 को मद्रास रेजीमेंट की 19वीं बटालियन में शामिल हुए थे। उन्होंने शुरुआत से ही चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों को चुना। वे 2003 से 2006 के बीच कश्मीर में आतंकरोधी अभियान में शामिल थे। फिर 2008 से 2010 के बीच स्वेच्छा से 54वीं राष्ट्रीय राइफल्स में सेवा देने की बात कही। इसके बाद 2010 से 2012 के बीच पूर्वोत्तर में स्वेच्छा से सेवा दी। दिसंबर 2015 में उन्होंने सियाचिन की सर्वाधिक ऊंची चौकियों में से एक पर अपनी तैनाती को चुना।’
स्कूल की मदद में रहते थे आगे : हनुमंतप्पा के बारे में प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर एमएफ कराजाजी ने बताया कि वे हमेशा स्कूल की मदद करते थे। पिछले साल ही बच्चों को 250 बेल्ट और टाई बांटी थी। इससे पहले भी वे अपने तरीके से बच्चों की मदद करते थे।
खबर न आए इसलिए काट दिया था केबल : सियाचिन में जब हिमस्खलन की खबर आई तो हनुमंतप्पा के परिवार वाले चिंतित हो उठे। परिवार के पुरुष सदस्यों ने केबल कनेक्शन काट दिया ताकि उनकी मां बासम्मा और प|ी महादेवी कोई सदमे भरी खबर न सुन पाएं। खुद सेना के साथियों से समाचार लेते रहे। जब उनके जीवित होने की खबर मिली तो केबल कनेक्शन जोड़ दिया।
कृमिनाशक दवा....
जिसके बाद मौके पर हड़कंप मच गया। 12 बच्चों की तबीयत कुछ देर में ठीक हो गई, जबकि 6 को स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। जबकि बालोद जिले के गुंडरदेही में 14 छात्रों की तबीयत बिगड़ गई। महासमुंद में 35, सरगुजा में 10 और सुकमा में 05 छात्र बीमार हुए हैं। जांजगीर-चांपा कलेक्टर ओमप्रकाश चौधरी ने बताया कि उन्होंने सभी बच्चों को मध्याह्न भोजन के बाद कृमिनाशक टेबलेट देने के निर्देश दिए थे। टेबलेट खाली पेट बच्चों को नहीं दी जाती।
जॉब्स का....
अचानक एक दिन जॉब्स ने अमेरिका में कंपनी के सभी छह वेयरहाउस बंद करने का प्रस्ताव रखा। जॉब्स कंप्यूटर का स्टॉक बनाने के खिलाफ थे। वह चाहते थे कि जितने ऑर्डर हों, उतने ही कंप्यूटर असेंबल किए जाएं और उसी दिन कूरियर से ग्राहक को भेज दिए जाएं। जॉब्स यह स्ट्रैटजी अपनाकर वेयरहाउस का खर्च बचाना चाहते थे। लेकिन मैनेजर पद पर तैनात डोना डुबिंस्की को लगा कि जॉब्स बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं। वेयरहाउस बंद करने से पूरी कंपनी का भविष्य दांव पर लग सकता है। डुबिंस्की का मानना था कि बेहतर डिस्ट्रीब्यूशन के दम पर ही एपल सफल हो सकती है। उनके हिसाब से यह कदम कंपनी के लिए तो घातक था ही, उन जैसे मिड लेवल मैनेजरों का भविष्य भी दांव पर लग सकता था। डुबिंस्की तब कोई सीनियर अधिकारी नहीं थीं। वह डिस्ट्रीब्यूशन एवं सेल्स एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में मैनेजर थीं। जॉब्स एपल चेयरमैन के साथ-साथ मैकिंटोश सेक्शन के वाइस प्रेसिडेंट भी थे। डुबिंस्की के लिए जॉब्स के फैसले को चुनौती देने का मतलब था कि उन्हें नौकरी से निकाला जा सकता था। लेकिन उन्होंने थोड़े पैसे जमा कर रखे थे। नौकरी जाने पर भी कुछ दिनों का खर्च चल जाता। इसलिए उन्होंने जॉब्स से कह दिया, ‘मैं आपके फैसले से सहमत नहीं हूं। मुझे नए प्रस्ताव के लिए 30 दिन का वक्त दिया जाए। वर्ना मैं नौकरी छोड़ दूंगी।’ जॉब्स को डुबिंस्की की बेबाकी पसंद आई। उन्होंने डुबिंस्की को प्रमोट कर एपल की सॉफ्टवेयर सब्सिडियरी में सीनियर मैनेजर बना दिया। छह साल बाद 1991 में डुबिंस्की ने एपल छोड़ दी। वह पाम कंप्यूटिंग की सीईओ बनीं। बाद में हैंडस्प्रिंग कंपनी बनाई। सबसे पहले स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों में हैंडस्प्रिंग भी एक है। कई साल बाद वह जॉब्स से मिलीं तो जॉब्स ने कहा था, मैं कभी फोन नहीं बनाने वाला। लेकिन 2007 में एपल ने पहला आईफोन लांच किया, जिसने इतिहास रचा। टिम कुक उन दिनों एपल में डिस्ट्रीब्यूशन का काम देखते थे। वही विभाग जहां कभी डुबिंस्की थीं। आज कुक कंपनी के सीईओ हैं।