मुझे जान का खतरा, नाबालिग ने बयां की नक्सलियों की ज्यादती
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बीजापुर में सीरियल ब्लास्ट, कोई हताहत नहीं, तीन आईईडी भी बरामद किया गया
मुझे नक्सलियों से जान का खतरा है इसलिए मै अपने गांव नहीं जाना चाहती। मेरी इच्छा है दंतेवाड़ा के आश्रम में रहकर पढ़ाई करुं। यह बात 15 साल की उस नाबालिग लड़की ने कही जिसे पड़ोसी राज्य ओड़िशा के मलकानगिरी चिल्ड्रन होम से यहां पुलिस लेकर आई थी। फिलहाल लड़की को महिला-बाल कल्याण अधिकारी प्रमिला सिंह को सौंपा गया है। दंतेवाड़ा जिले के अरनपुर की रहने वाली बदले हुए नामवाली 15 साल की गंगी के मुताबिक वह इसी 24 जनवरी को काम की तलाश में मलकानगिरी चली गई थी।
उसके पिता पर पुलिस का साथ देने का आरोप लगाकर नक्सलियों ने गांव छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। पिता की मौत इसी दहशत में हो गई थी। उसके परिवार में मां, छोटी तीन बहनें और एक भाई है। 13 वर्षीय नाबालिग भाई मड़कामी हुंगा उर्फ शंकर को नक्सलियों ने अपने साथ जबरिया रखकर उससे सड़क खोदने, पेड़ काटने, बम लगवाने का काम लिया।
उससे संतरी की ड्यूटी भी करवाई। उसकी छोटी बहन मंगली को जबरिया उठाकर ले गए जो फिलहाल दरभा इलाके के नक्सली लीडर विनोद के साथ घूमती है। गंगी की मानें तो गांव में जब कभी नक्सली बैठक लेते हैं तो उसमें इस बात के लिए धमकाते हैं कि खाना जल्दी क्यों नहीं लाते हो, सरकारी चावल खाने से बीमार हो जाओगे। पूरा गांव नक्सलियों के फरमान से परेशान है।
मददगारों ने नाम बताए : गंगी ने पुलिस को बताया कि गुफड़ी निवासी उसकी सरपंच बुआ मंजू कवासी और उसका शिक्षक पति मंगड़ू कवासी नक्सलियों के मददगार हैं जो उनके लिए रुपए-पैसे से लेकर राशन तक का इंतजाम करते हैं। नक्सली इनके घर रोजाना दावत उड़ाते हैं।