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फर्जी जमानत के मामले में दोबारा पकड़े जाएंगे आरोपी

9 वर्ष पहले
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बिलासपुर। रतनपुर तहसील कोर्ट से धारा 151 के तीन आरोपियों को फर्जी जमानत के आधार पर छोड़ने के मामले में नया मोड़ आ गया है। जिन आरोपियों को 6 दिन पहले तहसीलदार का सील-मुहर लगाकर फर्जी तरीके से जमानत दी गई थी, उन्हें दोबारा गिरफ्तार किया जा रहा है। तहसीलदार के निर्देश पर पुलिस ने एक आरोपी को पकड़कर तहसील कोर्ट में पेश किया। यहां उसकी जमानत रद्द कर दी गई और जेल भेज दिया गया। एक ही मामले में किसी आरोपी को दो बार गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने का यह संभवत: पहला मामला है। पुलिस दो अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है। 6 दिन पहले सोनारपारा की महिला से मारपीट के आरोपी संतोष सोनवानी व राजू सारथी के खिलाफ पुलिस ने धारा 151 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें तहसीलदार के कोर्ट में पेश किया। इससे पहले ग्राम मोहतराई के एक युवक को भी इसी धारा के तहत पकड़ा गया था। तीनों को तहसील कोर्ट में पेश किया गया। रविवार होने के कारण यहां तहसीलदार नहीं थे। इसके बाद भी सभी को जमानत पर छोड़ दिया गया। चपरासी चंदन कमल पर आरोप है कि उसने फोन पर तहसीलदार के कहने पर आरोपियों की जमानत के कागजात पर सील-मुहर लगाकर पुलिस को सौंप दिया और दोनों छूट गए। दूसरे दिन सच्चाई सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। तहसीलदार ने साफ कह दिया कि उन्होंने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था। घटना के पांच दिन बाद तहसीलदार ने इस मामले में रतनपुर थाना प्रभारी को पत्र लिखकर तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। शुक्रवार को पुलिस ने सोनारपारा निवासी राजू सारथी को गिरफ्तार कर लिया। उसका साथी संतोष सोनवानी नहीं मिला। तीसरे आरोपी का भी पता नहीं है। पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए मोहतराई में दबिश दी। कलेक्टर के आदेश पर चपरासी सस्पेंड इस पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी मिलने पर कलेक्टर ठाकुर रामसिंह ने गंभीरता दिखाई। कोटा एसडीएम को दोषी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए। उनके आदेश के बाद चपरासी चंदन कमल को निलंबित कर दिया गया। हालांकि इस मामले के बड़े दोषी अभी भी कार्रवाई की जद से बाहर हैं। कानूनी पेंच में फंसा मामला आरोपियों के खिलाफ तहसील कोर्ट में 8 जुलाई को इस्तागशा पेश कर दिया गया था। अब 13 जुलाई को मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान 6 दिनों तक आरोपियों को कहां रखा गया, इसका पुलिस के पास कोई जवाब नहीं है। नियमत:: आरोपियों को 24 घंटे तक ही थाने में रखा जा सकता है। अगर वे फरार माने जाएंगे तो पुलिस के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। एफआईआर क्यों नहीं? तहसीलदार भट्ठी ने टीआई को लिखे पत्र में इस मामले को गंभीर अपराध की श्रेणी में माना है। फर्जी तरीके से जमानत देना धारा 420 के तहत अपराध है। दंडाधिकारी होने के बाद तहसीलदार ने दोषियों के खिलाफ एफआईआर के निर्देश नहीं दिए हैं। इस मामले में पुलिस व तहसीलदार भी भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। तहसीलदार ने लिखा पत्र तहसीदार डीएस भट्ठी ने रतनपुर थाना प्रभारी को पत्र लिखकर आरोपियों की जमानत को फर्जी बताया है और उन्हें फिर से गिरफ्तार करने के निर्देश दिए हैं। पत्र क्रमांक 133 में तहसीलदार ने थानेदार को लिखा है कि दफ्तर के चपरासी ने उनके पदनाम का उपयोग कर आरोपियों को गलत ढंग से जमानत दी है। यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। चपरासी ने अवैध काम किया है।

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