पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंधमतरी। बदलते वक्त के साथ हमारी संस्कृति भी गुमनाम होती जा रही। हममें से कई लोग मां की लोरी सुनकर बड़े हुए हैं, लेकिन आजकल लोरियों की आवाज सुनाई तक नहीं देती। माताएं लोरियां भूल चुकी हैं, इससे शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्र प्रभावित हुआ है। माताओं का रुझान टीवी सीरियल की ओर बढ़ा, वहीं बच्चे मोबाइल से जुड़ रहे हैं।
पहले बच्चों को सुलाते वक्त माताएं पारंपरिक लोरियां गाती थी। माताएं ही नहीं दादी, नानी भी माथे पर हाथ फेरकर सुनाती थी, या चुप कराती थी। आजकल की माताएं लोरी ही भूल गई हैं।
बदलते वक्त के साथ मां व बच्चे का रुझान ही बदल गया। पहले के फिल्मों में भी लोरियां देखने-सुनने को मिलती थी। आज घरों में गूंजने वाली लोरियां ढूंढे नहीं मिलेंगी। इस कड़वे सच को समाजशास्त्री भी स्वीकार कर रहे हैं। कहीं सुनने मिल जाए तो बहुत बड़ी बात कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी।
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी खबर...
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.