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रेलवे पटरियां हैं टूटी, कभी भी हो सकता है गंभीर हादसा

9 वर्ष पहले
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बिलासपुर। पूरे जोन की पटरियों पर नजर रखने वाला जोनल मुख्यालय अपने सबसे करीबी स्टेशन की पटरियों पर नजर नहीं रख पा रहा है। बिलासपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 1 पर 16 स्लीपर एक कतार से टूटे हुए हैं। पैडरोल क्लिप निकल गए हैं और 32 फीट लंबी पटरी बिना आधार के लटक रही है, जिससे किसी भी समय गंभीर हादसे की आशंका बनी हुई है। बिलासपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म-1 पर बिछी पटरी को लाइन नंबर 1 एक कहा जाता है। इस लाइन को नागपुर इंड से देखते हुए आने पर नजर हावड़ा इंड पर फुट ओवरब्रिज के करीब सहसा ठहर जाती है। यहां दाईं ओर की पटरी पर लगा स्लीपर चकनाचूर नजर आता है। पटरी को स्लीपर से जोड़े रखने वाले पैडरोल क्लिप भी उखड़े हुए हैं। इससे पटरी के आर-पार दिखाई दे रहा है। भास्कर टीम ने पटरी की स्थिति का बारीकी से जायजा लिया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। आरपीएफ थाने से कुछ दूर आगे ही स्लीपर टूटा हुआ नजर आता है। आंखें तब फटी रह जाएंगी, जब इसके आगे एक कतार में 16 स्लीपर टूटे हुए दिखते हैं। इनमें से 8 स्लीपर का पैंडरोल क्लिप स्लीपर और पटरी से निकल चुका है। जबकि इतने ही क्लिप नाम मात्र के लिए लगे हैं। इनमें कोई पकड़ ही नहीं है। गौर से देखने पर पता चला कि सीमेंट के स्लीपर चकनाचूर होकर दो से तीन इंच नीचे धंस गए हैं। रेलपांत और स्लीपर के बीच संपर्क ही नहीं है। 16 स्लीपर की लंबाई तकरीबन 32 फीट होती है। यानी इतनी ही लंबी रेलपांत बिना आधार के लटक रही है। हादसे की आशंका इसलिए.. रेलवे के जानकार बताते हैं कि ट्रेन का भार रेलपांत पर होता है। रेलपांत सीमेंट के स्लीपर पर टिका होता है और सीमेंट का स्लीपर ठोस जमीन पर। इस तरह ट्रेन का भार जमीन पर ही रहता है, लेकिन इसमें रेलपांत और स्लीपर बीच की अहम कड़ी है। 32 फीट लंबी पटरी स्लीपर के बजाय हवा में है, यानी इस दायरे पर पड़ने वाला भार आधारहीन पटरी पर होता है। जानकारों के मुताबिक यह गंभीर स्थिति है और पटरी किसी भी समय टूट सकती है। ऐसा हुआ तो ट्रेन किसी भी वक्त हादसे का शिकार हो सकती है और पलट भी सकती है। हर रोज खतरे में हजारों जानें बिलासपुर रेलवे स्टेशन के 8 प्लेटफार्म में रेल यातायात का सबसे ज्यादा दबाव प्लेटफार्म नंबर 1 पर रहता है। बिलासपुर से हावड़ा की ओर जाने वाली तमाम मेल, एक्सप्रेस ट्रेनें इसी प्लेटफार्म पर ठहरती हैं। इंजीनियरिंग (रेल पथ) विभाग ने प्लेटफार्म नंबर 1 की पटरी पर ट्रेनों की रफ्तार 30 किलोमीटर प्रति घंटा तय की है। जाहिर है कि ट्रेनें धीमी गति से आती हैं, लेकिन क्षतिग्रस्त पटरी के लिए यह रफ्तार भी काफी है। पटरियों पर नजर रखने के लिए रेलवे के पास भारी भरकम अमला है। इसके बाद भी टूटे हुए 16 स्लीपर और निकले हुए क्लिप की अनदेखी कर रेल प्रशासन हजारों यात्रियों की जान खतरे में डाल रहा है।

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