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20 हजार मकान मालिकों की दूर होगी समस्या, अफसरों की टीम बनी

7 वर्ष पहले
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रायपुर. राजधानी की 50 कालोनियों के तकरीबन 20 हजार मकान मालिकों को बिना किसी बाधा के मकान बेचने-खरीदने की सहूलियत देने के लिए प्रशासन ने पहल शुरू कर है। दैनिक भास्कर ने शहर में करीब चार साल से चल रही इस बड़ी विसंगति को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। रायपुर कलेक्टर ने अपने स्तर पर छोटी ही कोशिश करते हुए तहसीलदार के नेतृत्व में चार राजस्व निरीक्षकों (आरआई) की टीम बना दी है।


समस्या बड़ी है और टीम छोटी, इसलिए पहले चरण में 50 में से तीन बड़ी कालोनियां ही ली जा रही हैं। ये टीम इन तीन कालोनियों की पूरी जमीन का एक तरह से नक्शा तैयार करेगी। इसमें दो महीना लगेगा। इसके बाद नक्शे के हिसाब से प्लाट के नामांतरण (लोगों के प्लाट उन्हीं के नाम पर चढ़ाने की कार्रवाई) के लिए शिविर लगाए जाएंगे। इस तरह, यह टीम तीन कालोनियों में लोगों को उनके मकान का संपूर्ण मालिकाना हक दिलाने में लगभग छह महीना लगाएगी।


शहर की बड़ी और पॉश कालोनियों में रहने वाले लोगों का दर्द दैनिक भास्कर में लगातार प्रकाशित किया जा रहा है। इस बारे में अफसरों का कहना है कि जिला स्तर पर ज्यादा बड़ी पहल नहीं की जा सकती। इस मामले में रायपुर एसडीएम ने शासन ने मार्गदर्शन भी मांगा है। लेकिन कलेक्टर ठाकुर राम सिंह ने एसडीएम एसके अग्रवाल को निर्देश दिए कि शहर की हाउसिंग सोसाइटी के नामांतरण मामले टीम बनाकर निपटाए जाएं।


इस टीम में तहसीलदार के साथ चार आरआई रखे जाएंगे। एसडीएम ने बताया कि निर्देश के आधार पर एक-दो दिन में टीम बना दी जाएगी। एडिशनल तहसीलदार जागेश्वर प्रसाद या कैलाश वर्मा को टीम का प्रमुख बनाया जाएगा। ये टीम समता कालोनी, चौबे कालोनी और अनुपम नगर सोसाइटी की जमीन के एक-एक इंच का खाका दो माह में तैयार करेगी। इन कालोनियों में नामांतरण के दो हजार केस आने की संभावना है।


समता में 300 मकानों का नामांतरण

शहर की हाउसिंग सोसाइटियों में समता कालोनी काफी बड़ी कालोनी है। आरडीए ने चिरूलडीह-बढ़ईपारा योजना क्रमांक-9 के तहत 1975 में समता कालोनी इलाके की जमीन में योजना लाई। 1977-78 में आरडीए ने पूरी योजना को हाउसिंग सोसाइटी को ट्रांसफर कर दिया। सोसाइटी ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से लेआउट पास कराया। लेआउट पास होने के बाद कुल 862 भूखंड काटे गए। प्लाट नंबर का आबंटन कर दिया गया। प्लाट नंबर के आधार पर ही रजिस्ट्री भी हो गई, लेकिन दस्तावेजों में खसरा नंबर नहीं था। समता कालोनी सोसाइटी के प्रबंधक शैलेष मिश्रा ने बताया कि सोसाइटी ने पहल करके नामांतरण की प्रक्रिया दो साल पहले शुरु करवाई थी। करीब 300 के नामांतरण हो गए हैं। 500 के नामांतरण बाकी हैं। सोसाइटी के अध्यक्ष रामविशाल उपाध्याय के समय में ये नामांतरण हुए, लेकिन वे खुद अपने मकान का नामांतरण नहीं करा पाए हैं।


दो माह में आएगी रिपोर्ट

सबसे पहले अनुपम नगर, समता कालोनी और चौबे कालोनी की हाउसिंग सोसाइटी की रिपोर्ट मंगाई जाएगी। एसडीएम से कहा गया है कि रिपोर्ट में यह बताया जाए कि डायवर्सन शीट क्यों नहीं बनी। खसरा नंबर क्यों नहीं है। क्या एक ही जमीन की बिक्री कई बार हो गई। आवासीय जमीन का कमर्शियल उपयोग तो नहीं हो रहा है। कमर्शियल जमीन का आवासीय उपयोग तो नहीं हो रहा है। ये सारी रिपोर्ट दो महीने के भीतर देने को कहा गया है।- ठाकुर राम सिंह कलेक्टर, रायपुर

लेन-देन से थोड़ा जल्दी

नामांतरण प्रकरण केवल तहसील दफ्तर से ही सुलझ सकता है। इसमें बड़ी दिक्कत यह आती है कि नामांतरण कराने के लिए वकील नियुक्त करना पड़ता है। वकील ही तहसील कोर्ट में आवेदन देता है फिर पेशी होती है। चार चरण में सुनवाई होती है। पटवारी, आरआई, अतिरिक्त तहसीलदार और फिर एसडीएम के दस्तखत के बाद ही नामांतरण का प्रकरण सुलझता है। लेन-देन से केस जल्दी सुलझता है। कई मामले तो मेरे सामने हुए हैं। - प्रमोद दुबे पदाधिकारी, चौबे कालोनी सोसाइटी

ये लंबी प्रक्रिया है : सिविल लॉयर ठाकुर आनंद मोहन सिंह


- किसी भी व्यक्ति को भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 109 और 110 के तहत नामांतरण के लिए वकील के जरिए तहसीलदार की कोर्ट में आवेदन देना पड़ता है।

- आवेदन मिलने के बाद तहसीलदार उसका प्रकाशन अखबार में कराता है। दावे-आपत्ति के लिए 15 दिन का समय दिया जाता है। पटवारी से प्रतिवेदन भी लेते हैं।

- पटवारी प्रतिवेदन के बाद जांच और परीक्षण होता है। इस आधार पर रिकार्ड मिलाते हैं। सोसाइटी के पदाधिकारी भी तहसीलदार के समक्ष गवाही के लिए बुलाए जाते हैं।

- रिकार्ड और गवाहियों के बाद तहसीलदार नामांतरण आदेश जारी होता है। इस प्रक्रिया में रफ्तार से काम किया जाए, तब भी एक केस पांच-छह महीने लग ही जाते हैं।