रायपुर । नसबंदी और जहरीली दवा से 20 लोगों की जान जाने के बाद भी सरकारी अमला लापरवाह बना दिखाई दे रहा है। जिन 24 कंपनियों की दवा को सरकार की एक एजेंसी छत्तीसगढ़ स्टेट मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (सीजीएमएससी) ने स्तरहीन करार दिया, वही दवाएं रेडक्रॉस जैसी दूसरी संस्था में खुलेआम बिक रही है। बाजार में भी यह उपलब्ध है। ये दवाइयां गुड्स मैन्यूफेक्चरिंग एंड प्रैक्टिस सर्टिफिकेट (जीएमपी)के आधार पर खरीदी जाती है, जो राज्य का ही खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग जारी करता है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वह इनकी बिक्री नहीं रोक सकता।
बिक्री नहीं रोक सकते: स्वास्थ्य विभाग
अमानक क्यों?
- टेक्निकल स्टाफ की कमी
- मैन्युफैक्चरिंग सही तापमान में नहीं
- रिकॉर्ड का सही रखरखाव नहीं
- मैन्युफैक्चरिंग बताकर री-पैकिंग करना
क्या होना था?
मॉनीटरिंग स्टाफ के पास फार्मेसी की डिग्री होनी चाहिए, नहीं थी ।
साफ-सफाई, भवन, मेटेरियल की गुणवत्ता का ध्यान रखना चाहिए था।
दवाइयों की जांच, लैब के उपकरण, बनने और सप्लाई का रिकॉर्ड रखना होता है।
दवाइयों पर मैन्युफैक्चरिंग, मार्केटिंग, रिपैकिंग की सही जानकारी दी जानी चाहिए।
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