रायपुर। जीई रोड पर धरमपुरा से एयरपोर्ट जाने के लिए 30 करोड़ नई सड़क तो बना दी लेकिन प्रशासन उसका उपयोग करवाने के लिए सिस्टम नहीं बना सका। ट्रैफिक के झंझट में फंसे बिना ही इस नई सड़क से सीधे एयरपोर्ट पहुंचा जा सकता है। उसके बावजूद लोग सड़क का उपयोग नहीं कर रहे हैं। दरअसल जीई रोड से सड़क पर एंट्री करने के लिए डिवाइडर ही नहीं खोला गया है। शहर से एयरपोर्ट जाने वालों को नई सड़क पर एंट्री करने के लिए करीब 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। इस दिक्कत के कारण ही सड़क पर एक-एक घंटे में बड़ी मुश्किल से दो-तीन वाहन ही गुजरते हैं।
भास्कर टीम ने शनिवार दोपहर 2 से 3 बजे धरमपुरा से एयरपोर्ट जाने वाली सड़क का सर्वे किया। धरमपुरा के मुहाने पर टीम घंटेभर खड़ी रही। इस दौरान सड़क से केवल तीन गाड़ियां गुजरी। पूरे समय फोरलेन सड़क पर सन्नाटा पसरा रहा। न इधर से कोई वाहन जा रहे थे और न ही दूसरी आेर से गाड़ियां आ रही थीं। अलबत्ता गांव के बच्चे स्कूल से छूटने के बाद वहां रोड पर क्रिकेट जरूर खेल रहे थे। मिडिल स्कूल के विद्यार्थी साइकिल पर करतब भी दिखा रहे थे। भास्कर टीम धरमपुरा से एयरपोर्ट तक जाने वाली पूरी सिक्स लेन सड़क का सर्वे किया। इस सड़क से एयरपोर्ट की दूरी 9 किलोमीटर है। इसमें साढ़े छह किलोमीटर की सड़क नई सिक्स लेन है। इस सड़क पर कहीं भी ट्रैफिक का झंझट नहीं था। इसके बावजूद लोग उपयोग नहीं कर रहे हैं। इससे करोड़ों खर्च करने के औचित्य पर ही सवाल खड़ा हो रहा है।
वीआईपी रोड का दबाव कम करने बनाई थी सड़क
धरमपुरा से एयरपोर्ट के लिए 6.5 किमी लंबी सड़क 30 करोड़ खर्च कर सितंबर 2013 में बनाई गई थी। इसे बनाने का मकसद सड़क पर से ट्रैफिक का दबाव कम करना था। नई सड़क का उपयोग नहीं हो रहा, इसलिए वीआईपी रोड का दबाव कम नहीं हो रहा है।
केवल डिवाडर खोलने से उपयोगी हो जाएगी सड़क
एयरपोर्ट जाने के लिए बनाई गई करोड़ों की सड़क का उपयोग केवल डिवाइडर खोलने से होने लगेगा। सर्वे के दौरान यह सामने आया कि रायपुर शहर से एयरपोर्ट जाने के लिए उस सड़क का उपयोग करने वालों को 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। जीई रोड पर जहां से सड़क शुरू होती है, उस पर एंट्री करने के लिए डिवाइर खोलकर रास्ता नहीं बनाया गया है। लोगों को नई सड़क तक पहुंचने के लिए नई राजधानी वाले मोड़ तक जाना पड़ता है। धरमपुरा वाली नई सड़क शुरू होती है, वहां से नई राजधानी वाले मोड़ की दूरी करीब पांच किलोमीटर है। वहां पहुंचकर उतनी ही दूरी लौटनी पड़ती है। इस तरह 10 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद ही सड़क पर एंट्री की जा सकती है। सड़क जहां से शुरू हुई है वहां सिग्नल बनाकर डिवाइर को खोलने से लोगों को लंबा सफर तय नहीं करना पड़ेगा और सड़क का उपयोग बढ़ जाएगा।
वीआईपी रोड को नो पार्किंग जोन क्यों
वीआईपी रोड के होटलों और मैरिज पैलेस पर वैवाहिक आयोजनों के दौरान लगने वाले जाम को देखते हुए प्रशासन ने इसे नो-पार्किंग जोन घोषित किया है। हालांकि जाम की समस्या को दूर करने के लिए कई बार प्रयास किए गए। सड़क पर वाहन पार्क करवाने वाले मैरिज पैलेस और होटल संचालकों को ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन की ओर से नाेटिस भेजी गई, लेकिन यह कार्रवाई केवल कागजों तक ही सीमित रही। प्रशासन या पुलिस ने सख्ती कभी नहीं बरती। दो साल पहले एक मैरिज पैलेस को सील करने की औपचारिकता की गई थी, लेकिन बाद में सबकुछ सेटल हो गया और यहां का सिस्टम नहीं बदला। अब नो पार्किंग जोन घोषित किया गया है, इससे यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि क्या अब तक यह सड़क पार्किंग जोन थी? आला अफसर इस सवाल का जवाब नहीं दे रहे हैं।