रायपुर। इरीगेशन विभाग में सहायक अभियंताओं की पदोन्नति को लेकर रोचक मामला सामने आया है। यहां 86 ऐसे इंजीनियर हैं जिन्हें 32 सालों से पदोन्नति नहीं मिली। वे अविभाजित मध्यप्रदेश के दौरान जिस पद पर भर्ती हुए थे अब तक उसी पद पर काम कर रहे हैं। हालांकि अब तक उन्हें कार्यपालन अभियंता बन जाना था। यह बात अलहदा है कि वे वेतन इस पद से अधिक का पा रहे हैं। तीन दशकों से पदोन्नति नहीं मिलने की वजह थी कि विभाग में ये पद खाली ही नहीं थे। छत्तीसगढ़ बनने के बाद इंजीनियर की पदोन्नति और भी दुष्कर हो गई। यह बात इंजीनियरों ने इरीगेशन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के ध्यान में लाई।
उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने मामला केबिनेट में रखने को कहा। पिछले दिनों हुई केबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई। पदोन्नतियों को मंजूरी तो दे दी गई, लेकिन विशेष प्रकरण में।
भास्कर को पता चला है कि विभाग इंजीनियरों के 86 पद सृजित करेगा क्योंकि विभाग में ये पद खाली नहीं हैं। पात्र उम्मीदवारों के बराबर पद सृजित करना सांख्येत्तर पद कहलाता है। 86 पदों पर जैसे ही सहायक अभियंता कार्यपालन अभियंता बन जाएंगे ये पद स्वयमेव खत्म कर दिए जाएंगे। यानी पदोन्नति तक ही इन पदों का अस्तित्व रहेगा।
एक और खास बात यह कि पदोन्नति से सरकार पर आर्थिक बार नहीं पड़ेगा क्योंकि पहले से ही इन इंजीनियरों को पर्याप्त वेतन मिल रहा है। अब सीआर व अन्य प्रक्रियाएं शुरू की जा रही हैं।