मुझे कितना मिलेगा यह पहले बताओ
विकास नहीं प्रमोद का बहिष्कार
मन की बात सामने लाने का सिलसिला
इंतजार का फल मीठा नहीं होता है
डीजे नहीं तो पुलिस सायरन में नाच लेंगे
राज्य सरकार इन दिनों आम बजट की तैयारी में लगी हुई है। सरकार अपने मंत्रियों के अलावा विपक्षी विधायकों, व्यापारियों से बजट पर राय मांग रही है। पिछले बार जिन मंत्रियों के विभागों को कम पैसे मिले थे, वे इस बार ज्यादा पैसे की मांग कर रहे है। अपना विभागीय बजट बढ़ाने के लिए वे इस बार ऐढ़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। ऐसे में एक मंत्री ने मजाकिया लहजे में दूसरे मंत्री से कहा, मैं भी आपके विभाग का बजट बढ़ाने के लिए बोलूंगा पहले यह तो बताआे मुझे कितना मिलेगा।
घुमक्कड़श्री
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केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी की मौजूदगी में दीक्षांत समारोह आयोजित करने की तैयारी में जुटे पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय प्रशासन को जोर का झटका लगा है। खबर आ रही है कि स्मृति ईरानी इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नहीं आएंगी। पूर्व में उनके नहीं आने की सूचना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने दीक्षांत की तिथि ही बदल दी थी। वे स्मृति की हरी झंडी का इंतजार कर रहे थे। अब उनके नहीं आने की खबर से सभी दु:खी हैं। कुछ प्राध्यापकों ने यहां तक कह डाला की हमें अब छात्रों को देने वाली नसीहत बदलनी पड़ेगी कि इंतजार का फल मीठा होता है।
इन दिनों ज्यादा तेज आवाज में डीजे बजाने वालों पर पुलिसिया कार्रवाई तेजी से हो रही है। इसे लेकर शादी-विवाह में जमकर नाचने वालों का मन उदास है। हाल ही में एक बारात के सामने डीजे वाले तेज आवाज के साथ जा रहे थे। डीजे की धुन पर बारात में शामिल लोग थिरक रहे थे। बारात कुछ दूर पहुंची ही थी कि पुलिस ने सड़क पर जा रहे बारात को रोककर उसका डीजे जब्त कर लिया। बारातियों ने इसका विरोध भी किया लेकिन उनकी एक नहीं चली। इससे नाराज बारातियों ने पुलिस के जाने के बाद कहा डीजे नहीं तो पुलिस सायरन ही बजा दो, कम से कम उसी में नाच लेंगे।
रायपुर नगर निगम में राजनीति उफान पर है। भाजपा पार्षदों ने महापौर प्रमोद दुबे के कार्यक्रमों का विरोध तो किया ही उन्हें अपने किसी कार्यक्रम में नहीं बुलाने का निर्णय लिया है। इस निर्णय पर महापौर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मेरा नहीं विकास का विरोध है। इस पर भाजपा पार्षद चुटकी लेते हुए कह रहे हैं, अरे भइया आपने तो खुद विकास को निपटा दिया है, हम उसका कैसे विरोध कर सकते हैं? हम तो प्रमोद का बहिष्कार कर रहे हैं।
इन दिनों प्रदेश के सत्ताधारी दल आैर विपक्षी दल के नेता जमकर अपने मन की भड़ास निकाल रहे हैं। पहले यह सब कुछ लोगों के बीच निकलता था। अब तो सार्वजनिक रूप से दोनों ही पार्टियों के नेताओं की ओर से मन की बातें निकल रही है। सत्ताधारी दल के नेता अफसरशाही पर अपने मन की भड़ास निकाल रहे हैं तो विपक्षी दल के नेता अपने ही दल के नेताआें पर कटाक्ष कर रहे हैं। इसे देखकर राजनीति से जुड़े लोगों का कहना है कि मन की बात शुरू होने के अच्छे परिणाम आ रहे हैं। इससे कम से कम लोग मन की बात सामने तो ला रहे हैं।