एम्स में रहेगा मेल नर्सों का वर्चस्व, 250 में 155 पुरुष स्टाफ नर्स
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मेल नर्सों का वर्चस्व रहेगा। मरीजों की देखभाल की जिम्मेदारी इन्हीं पर होगी। एम्स प्रशासन की चयन सूची में 250 स्टाफ नर्सों में 155 मेल नर्स हैं। बाकी 95 फीमेल नर्स हैं। यानी एसटी को छोड़कर बाकी केटेगरी में मेल नर्स फीमेल की तुलना में दुगुने हैं। अधिकारियों के अनुसार एम्स में मेल नर्सों को नियमित नौकरी देने में कोई मनाही नहीं है। नर्सों की ज्वाइनिंग के बाद एम्स में मरीजों की देखरेख बेहतर हो पाएगी। साथ ही बेड विस्तार को भी मदद मिलेगी। दूसरी ओर राज्य सरकार ने मेल नर्सों को सरकारी नौकरी देना बंद कर दिया है। इस पर विवाद भी होता रहा है।
एम्स प्रशासन ने 250 नियमित स्टाफ नर्सों की भर्ती के लिए जुलाई में इंटरव्यू लिया था। सात महीने बाद मेरिट के अनुसार चयन सूची जारी कर दी गई है। अनारक्षित वर्ग से 126, ओबीसी से 67, एससी से 38 व एसटी केटेगरी से 19 नर्सों का चयन किया गया है। इन नर्सों को एक माह में ज्वाइन करना होगा। चयन सूची को देखने से लगता है कि हर केटेगरी में फीमेल की तुलना में मेल नर्स ज्यादा हैं। यूआर केटेगरी से मेल नर्सों की संख्या 86, ओबीसी से 45, एससी से 21 मेल नर्सों का चयन किया गया है। केवल एसटी केटेगरी में फीमे नर्स मेल से ज्यादा हैं। इस केटेगरी में 16 फीमेल व तीन मेल नर्सों का चयन हुआ है। वेटिंग सूची में 50 नर्सों का नाम हैं। इनमें कुल छह मेल नर्स हैं। छत्तीसगढ़ में कुछ निजी नर्सिंग कॉलेज मेल छात्र को एडमिशन दे रहे हैं, लेकिन सरकारी नौकरी में केवल महिला नर्सों को लिया जा रहा है। इस मामले को लेकर मेल नर्स हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटा चुके हैं।
देश के सभी एम्स में मेल नर्सों का चयन किया जाता है। इसमें विवाद जैसी कोई बात नहीं है। चयनित नर्सों को एक माह में ज्वाइन करना होगा। ड्यूटी के पहले उन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी। नीरेश शर्मा, डिप्टी डायरेक्टर प्रशासन एम्स