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संपत्ति कर वृद्धि पर विवाद के बीच निगम ने शुरू किया भवनों का नाप

5 वर्ष पहले
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राजधानी में संपत्ति कर बढ़ेगा या नहीं, इस मुद्दे पर अभी विवाद जारी ही है कि नगर निगम के दस्तों ने बड़े भवनों को टैक्स बढ़ाने के नजरिए से फिर निशाने पर ले लिया है।

शुक्रवार को निगम अफसरों का दस्ते ने रायपुरा और आसपास तीन परिसर नापे और तीनों का ही संपत्ति कर नापजोख से कहीं कम निकला। उनका टैक्स डेढ़ गुना बढ़ा दिया गया है। माना जा रहा आमदनी बढ़ाने की यह मुहिम 31 मार्च तक जारी रहेगी और निगम कोशिश में लगा है कि तब तक शहर के सभी बड़े भवनों को नापकर उनके टैक्स का पुनर्निर्धारण कर दिया जाए। पिछले चार महीने में नगर निगम के राजस्व दस्ते ने होटल, कांप्लेक्स, शो-रूम तथा शादी भवनों को मिलाकर लगभग 150 से ज्यादा बड़े भवनों की टैक्स के लिहाज से नए सिरे से नापजोख की थी। इससे खुलासा हुआ था कि इन भवनों से निगम को जितना संपत्ति कर मिलना चाहिए, उसका आधा भी नहीं मिल रहा है। केवल इतने ही भवनों की जांच में नगर निगम अपना राजस्व लगभग 2 करोड़ रुपए बढ़ाने में कामयाब रहा था। निगम अफसरों के मुताबिक राजधानी में ऐसे भवनों की संख्या 5 हजार से अधिक हो सकती है जो काफी बड़े हैं लेकिन उस हिसाब से उनका संपत्ति कर बहुत कम है। इनसे ही निगम की आमदनी 15 करोड़ रुपए सालाना तक बढ़ सकती है।

दोगुना निकला टैक्स
नगर निगम के वसूली उड़नदस्ते ने शुक्रवार को रायपुर में तीन शो रूम संचालकों के यहां दबिश दी। संपत्तिकर वसूली के लिए निकला राजस्व अमला जोन पांच के माधव राव सप्रे वार्ड पहुंचा। रायपुरा मेन रोड पर अमित अग्रवाल के दो शो-रूम तथा आलोक अग्रवाल के यार्ड की नापजोख की। राजस्व अधिकारी अरुण दुबे ने बताया कि एक शोरूम का संपत्ति 28570 रुपए से बढ़ाकर 73494 रुपए और दूसरे शो-रूम का संपत्तिकर 9720 रुपए से बढ़ाकर 52568 तय कर दिया गया है। इसी तरह, यार्ड का संपत्ति कर 74766 रुपए था, जिसे बढ़ाकर 130216 रुपए हो गया। केवल इन्हीं तीन भवनों से निगम ने पिछले साल 1.40 लाख रुपए टैक्स लिया था, लेकिन अब 2.56 लाख रुपए लिए जाएंगे।

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